दशलक्षण पर्व पर निकली भव्य शोभायात्रा, 10 उपवास करने वाले छह तपस्वियों का कराया पारणा

भाटापारा। सकल दिगंबर जैन समाज भाटापारा द्वारा श्री दिगंबर जैन परवार पंचायती मंदिर के तत्वावधान में दशलक्षण महापर्व श्रद्धा, भक्ति और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। पर्व के समापन पर श्रीजी की भव्य शोभायात्रा निकाली गई। वहीं, दस दिनों तक कठिन तप और उपवास करने वाले तपस्वियों का समाज एवं परिजनों की उपस्थिति में पारणा कराया गया। इस अवसर पर धार्मिक अनुष्ठानों के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों के विजेताओं का सम्मान भी किया गया।

 

समाज अध्यक्ष पीयूष जैन ने बताया कि दशलक्षण पर्व के दस दिनों तक प्रतिदिन सुबह आचार्य श्री विशुद्ध सागर महाराज के परम शिष्य प्रीतेश भैया के सानिध्य में श्रीजी का विधि-विधान से पूजन, अभिषेक एवं मंगल आरती की गई। पूरे पर्व के दौरान समाज के सदस्यों ने उत्साहपूर्वक धार्मिक गतिविधियों में भाग लेकर धर्माराधना की।

श्रीजी की पालकी के साथ निकली शोभायात्रा

दशलक्षण महापर्व के समापन पर श्रीजी को पालकी में विराजित कर नगर के विभिन्न मार्गों से भव्य शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में जैन समाज के सदस्यों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। श्रद्धालुओं ने पालकी के समक्ष भक्ति, आरती और धार्मिक जयकारों के साथ अपनी श्रद्धा व्यक्त की। पूरे आयोजन के दौरान भक्तिमय वातावरण बना रहा।

तपस्वियों का समाज ने कराया पारणा

पर्व के दौरान कठिन तपस्या करने वाले तपस्वियों का पारणा समारोह विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। दस उपवास की कठिन साधना पूर्ण करने वाले छह तपस्वियों संजय, सजल, नंदिनी, छाया, बबीता और सारिका का समाज एवं उनके परिवारजनों ने पारणा कराया।

इसी क्रम में पंचमेरू उपवास करने वाली पूजा, निधि और अंजु तथा सोलहकारण व्रत करने वाली संगीता, शशि, सुमन, अंशु और अंजू जैन का भी पारणा कराया गया। तपस्वियों की साधना और धर्म के प्रति समर्पण की समाजजनों ने सराहना की।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों के विजेता सम्मानित

दशलक्षण पर्व के दस दिनों के दौरान समाज द्वारा विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इन कार्यक्रमों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को समाज के वरिष्ठ सदस्यों एवं कमेटी पदाधिकारियों ने सम्मानित किया। विजेताओं को मोमेंटो प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया गया।

दस धर्मों की आराधना से आत्मकल्याण का संदेश

बरायेठा से पधारे प्रीतेश भैया ने अपने प्रवचन में दशलक्षण महापर्व के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए दस धर्मों के पालन का संदेश दिया। उन्होंने बताया कि इस पर्व में उत्तम क्षमा, मार्दव, आर्जव, शौच, सत्य, संयम, तप, त्याग, आकिंचन्य और ब्रह्मचर्य धर्म की आराधना की जाती है।

उन्होंने कहा कि मनुष्य को क्रोध, अहंकार, मायाचारी और लोभ का त्याग कर क्षमा, विनय, सरलता एवं पवित्रता को अपने जीवन में अपनाना चाहिए। संयम और तप से कर्मों की निर्जरा होती है, जबकि त्याग एवं परिग्रह को सीमित रखने से जीवन में संतुलन आता है। ब्रह्मचर्य का वास्तविक उद्देश्य आत्मा में रमण करते हुए आत्मकल्याण की दिशा में आगे बढ़ना और आत्मा से परमात्मा बनने के लक्ष्य को प्राप्त करना है।

दशलक्षण महापर्व के समापन पर धार्मिक आस्था, तपस्या, त्याग और आत्मशुद्धि का संदेश देते हुए समाजजनों ने धर्म के मार्ग पर चलने तथा जीवन में सद्गुणों को अपनाने का संकल्प लिया।

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