पूर्व सीएम भूपेश बघेल के OSD रहे अपर कलेक्टर बोरघरिया गिरफ्तार, खाते में 170 लेन-देन से 66.64 लाख जमा होने का ED का दावा

  • CGPSC भर्ती अनियमितता और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कार्रवानई; ईडी ने कोर्ट से रिमांड लेकर शुरू की पूछताछ

दीपक अवस्थी,रायपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितता और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बलरामपुर-रामानुजगंज के अपर कलेक्टर चेतन बोरघरिया को गिरफ्तार किया है। बोरघरिया पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कार्यालय में OSD के रूप में भी पदस्थ रह चुके हैं।

गिरफ्तारी के बाद ईडी ने उनके बैंक खातों में हुए लेन-देन को लेकर भी जानकारी सामने रखी है। एजेंसी के अनुसार 170 अलग-अलग लेन-देन के जरिए कुल 66.64 लाख रुपए खाते में जमा हुए। ईडी इन रकम के स्रोत और CGPSC मामले से इनके कथित संबंध की जांच कर रही है।

उम्मीदवारों से 3 करोड़ से ज्यादा वसूली का दावा

ईडी के अनुसार जांच में सामने आया है कि CGPSC-2021 परीक्षा के उम्मीदवारों से कथित तौर पर 3 करोड़ रुपए से अधिक की रकम वसूली गई। एजेंसी इस रकम से जुड़े वित्तीय लेन-देन की कड़ियों की जांच कर रही है। जांच का एक पहलू यह भी है कि इस रकम को अलग-अलग माध्यमों से किस तरह खपाया या वैध दिखाने का प्रयास किया गया।

कंपनी के लेन-देन की भी जांच

ईडी ने जांच में M/s Figurecave E-Com (OPC) Private Limited के जरिए हुए लेन-देन को भी जांच के दायरे में लिया है। एजेंसी को संदेह है कि कथित तौर पर अवैध तरीके से प्राप्त रकम को वैध आय के रूप में दिखाने के लिए कंपनी का इस्तेमाल किया गया हो सकता है।

2019 से 2022 तक रहे थे OSD

चेतन बोरघरिया वर्ष 2019 से 2022 के बीच तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कार्यालय में OSD के पद पर कार्यरत रहे थे। इसके बाद वे प्रशासनिक सेवा में अलग-अलग जिम्मेदारियों पर रहे और वर्तमान में बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में अपर कलेक्टर के पद पर पदस्थ थे।

छापेमारी के बाद गिरफ्तारी

ईडी ने इससे पहले 1 सितंबर को बोरघरिया से जुड़े परिसरों पर कार्रवाई की थी। जांच में बैंक रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों को भी खंगाला गया। इसके बाद 11 सितंबर को पीएमएलए के तहत उनकी गिरफ्तारी की गई। विशेष पीएमएलए अदालत में पेश किए जाने के बाद ईडी को पूछताछ के लिए रिमांड मिली।

ईडी के दावों की न्यायिक प्रक्रिया में जांच जारी है। आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष अदालत के निर्णय के बाद ही माना जाएगा।

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