बालोद।छत्तीसगढ़ के बालोद जिले से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है, जहां नेशनल हाईवे-30 पर स्थित मरकाटोला घाट के पास एक भीषण सड़क हादसे ने पांच परिवारों के चिराग बुझा दिए। यह भयावह दुर्घटना गुरुवार-शुक्रवार की दरमियानी रात उस समय हुई जब गणेश विसर्जन के कार्यक्रम से लौट रहे युवकों की डीजे से बंधी पिकअप गाड़ी सड़क किनारे खड़ी थी। इसी दौरान विपरीत दिशा से आ रहे एक धान से लदे तेज रफ्तार ट्रक ने अनियंत्रित होकर पिकअप को पीछे से इतनी जोरदार टक्कर मारी कि मौके पर ही चीख-पुकार मच गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि पिकअप गाड़ी के परखच्चे उड़ गए और वह पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई, वहीं भारी-भरकम ट्रक भी असंतुलित होकर बीच सड़क पर ही पलट गया। इस भीषण भिड़ंत में पिकअप सवार पांच युवकों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि छह से अधिक युवक गंभीर रूप से घायल हो गए हैं, जिन्हें इलाज के लिए तत्काल नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।बारिश के कारण फिसलन और अंधाधुंध रफ्तार बनी हादसे की वजह, घायलों को रायपुर किया गया रेफरहादसे की सूचना मिलते ही पुरूर थाना पुलिस और डायल-112 की टीम तत्काल मौके पर पहुंची और स्थानीय लोगों की मदद से पिकअप में फंसे घायलों और शवों को बाहर निकाला। पुलिस के मुताबिक, क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रही भारी बारिश के कारण सड़क पर काफी फिसलन थी और दृश्यता भी कम थी, जिसके चलते तेज रफ्तार ट्रक चालक वाहन पर से नियंत्रण खो बैठा। दुर्घटना में घायल हुए युवाओं की नाजुक हालत को देखते हुए प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए रायपुर के बड़े अस्पताल में रेफर कर दिया गया है। पुलिस ने मर्ग कायम कर शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है।हादसों का ‘ब्लैक स्पॉट’ बनता जा रहा मरकाटोला घाट, पिछले महीने ही हुई थी बाइक राइडर रिद्धि ठक्कर की मौतयह दुर्घटना इस बात का बड़ा प्रमाण है कि नेशनल हाईवे-30 का मरकाटोला घाट अब राहगीरों के लिए एक खतरनाक ‘ब्लैक स्पॉट’ में तब्दील हो चुका है। इसी घाटी पर पिछले महीने मुंबई की मशहूर महिला बाइक राइडर रिद्धि ठक्कर की भी एक सड़क हादसे में जान चली गई थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि भारी बारिश के मौसम में इस घाट पर न सिर्फ अंधाधुंध रफ्तार के कारण गाड़ियां आपस में टकरा रही हैं, बल्कि पहाड़ों से पत्थर गिरने और भूस्खलन का खतरा भी लगातार बना हुआ है, जिससे इस मार्ग पर सफर करना हर पल मौत को दावत देने जैसा हो गया है।








