भुगतान न करने पर नगर पंचायत डोंगरगांव में अदालत की बड़ी कार्रवाई, फायर ब्रिगेड और क्रेन जब्त करने के बाद अब सूडा की संपत्तियों पर भी कुर्की की लटकती तलवार

  • सिंध एजेंसी और नगर पंचायत के बीच का क्या है पूरा कानूनी विवाद

राजनांदगांव।यह पूरा मामला राजनांदगांव जिले के डोंगरगांव नगर पंचायत का है, जहां सिविल निष्पादन प्रकरण ‘सिंध एजेंसी (प्रोपराइटर) बनाम नगर पंचायत डोंगरगांव व अन्य’ (Civil EXE/19/2025) के तहत यह सख्त कार्रवाई की गई है। दरअसल, मूल सिविल सूट संख्या CSB-142/5/2023 में न्यायालय ने 20 जून 2025 को ही डिक्री पारित कर दी थी। अदालत ने नगर पंचायत को आदेश दिया था कि वह डिक्रीदार सिंध एजेंसी को मूल धन राशि के रूप में 13,60,401.71 रुपये का भुगतान करे। इसके साथ ही इस पर तय ब्याज, अदालती खर्च और निष्पादन की लागत का भी भुगतान किया जाना था। नगर पंचायत और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा इस आदेश को लगातार नजरअंदाज किया गया और लंबे समय तक इस डिक्री की राशि का भुगतान नहीं किया गया।

अदालत का वारंट और नगर पंचायत कार्यालय में अचानक पहुंची टीम

बार-बार मौका दिए जाने के बाद भी जब नगर पंचायत ने राशि जमा नहीं की, तो तृतीय जिला न्यायाधीश राजनांदगांव की अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए सीधे कुर्की वारंट (जब्ती आदेश) जारी कर दिया। यह वारंट विशेष रूप से जिला नाजिर राजनांदगांव के नाम जारी किया गया था। इस आदेश के तहत कलेक्टर राजनांदगांव (जिला शहरी विकास अभिकरण) और नगर पंचायत डोंगरगांव को मुख्य पक्षकार बनाते हुए उनकी संपत्तियों को कुर्क करने के निर्देश दिए गए। इसी आदेश के परिपालन में न्यायालय की एक विशेष टीम गवाहों को साथ लेकर अचानक डोंगरगांव नगर पंचायत कार्यालय पहुंच गई, जिससे वहां मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों में अफरा-तफरी मच गई।

फायर ब्रिगेड से लेकर दफ्तर के एसी और कंप्यूटर तक ज़ब्त

अदालती टीम ने मौके पर मौजूद रहकर नगर पंचायत के संसाधनों को ज़ब्त करना शुरू किया। इस कार्रवाई के तहत आपातकालीन सेवाओं में इस्तेमाल होने वाला फायर ब्रिगेड टैंकर, ट्रैक्टर, क्रेन और वैक्यूम मशीन हॉर्स जैसे बड़े और महंगे शासकीय वाहनों को अपने कब्जे में ले लिया। डिक्रीधारी सिंध एजेंसी की तरफ से अदालत में कुल मिलाकर करीब 31 लाख रुपये मूल्य की शासकीय संपत्तियों की एक विस्तृत सूची सौंपी गई है। इस सूची में केवल वाहन ही नहीं, बल्कि नगर पंचायत कार्यालय के भीतर उपयोग होने वाले 20 एयर कंडीशनर (AC), कूलर, लोहे की अलमारियां, कंप्यूटर सेट और अन्य कीमती फर्नीचर भी शामिल हैं, जिन्हें आने वाले दिनों में पूरी तरह ज़ब्त कर लिया जाएगा।

कलेक्टर के अधीन आने वाले जिला शहरी विकास अभिकरण पर भी कार्रवाई की तैयारी

नगर पंचायत में हुई इस ज़ब्ती के बाद भी यदि डिक्री की पूरी रकम और ब्याज की वसूली नहीं हो पाती है, तो न्यायालय के निर्देशानुसार अगली कार्रवाई कलेक्टरेट परिसर में स्थित जिला शहरी विकास अभिकरण (DUDA) के खिलाफ होगी। चूंकि इस मामले में कलेक्टर राजनांदगांव (सूडा के माध्यम से) को भी पक्षकार बनाया गया है, इसलिए सूडा की चल संपत्तियों को भी ज़ब्त करने की पूरी तैयारी कर ली गई है। सरकारी संपत्तियों की इस तरह हो रही सरेआम कुर्की और ज़ब्ती की वजह से राजनांदगांव के पूरे प्रशासनिक हलके में भारी हड़कंप मचा हुआ है और अधिकारी अब इस कानूनी मुसीबत से बचने का रास्ता तलाश रहे हैं।

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