महर्षि वाल्मीकि जयंती पर पूजा-अर्चना और वंदना कार्यक्रम आयोजित

संदीप यादव मुंगेली, छत्तीसगढ़ 25 अक्टूबर 2026 को महर्षि वाल्मीकि जयंती के पावन पर्व पर मुंगेली नगर स्थित शंकर मंदिर में श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ पूजा-अर्चना, वंदन एवं जयंती समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर जनप्रतिनिधियों और गणमान्य नागरिकों ने महर्षि वाल्मीकि का स्मरण किया तथा उनके आदर्शों, विचारों और उपदेशों को जीवन में आत्मसात करने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम में प्रमुख रूप से उपस्थित रहे

कार्यक्रम में गुलाबचंद उपाध्याय, पुहुपराम साहू (विश्व हिंदू परिषद, मुंगेली नगर अध्यक्ष), आकाश सोनी, नर्मदा सिंह राजपूत, डॉ. राजीव सिंह ठाकुर, कृष्ण कुमार दीक्षित, मोहन उपाध्याय, बुद्धेश्वर उपाध्याय, बीरबल सोनकर, अजय तिवारी, दयाचंद उपाध्याय, अश्वनी उपाध्याय, विजय चौबे, विजयगोपाल साहू, पीतांबर सिंह ठाकुर, जानवी ठाकुर, श्रेया पाण्डेय, श्रीयांशी पाण्डेय, देवांशी पाण्डेय, विजय बाघमार, रितेश पाण्डेय सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

सभी उपस्थितजनों ने महर्षि वाल्मीकि जी की पूजा-अर्चना और वंदना कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए।

महर्षि वाल्मीकि जी का जीवन और योगदान

महर्षि वाल्मीकि को आदिकवि कहा जाता है। उन्होंने विश्व प्रसिद्ध महाकाव्य रामायण की रचना की। भारतीय साहित्य, संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा में उनका योगदान अविस्मरणीय है।

महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन, सत्य, धर्म, मर्यादा, त्याग और कर्तव्यपरायणता का संदेश देती है। रामायण के माध्यम से समाज को आदर्श जीवन जीने, सत्य के मार्ग पर चलने तथा कर्तव्यों के पालन की प्रेरणा प्राप्त होती है।

मान्यताओं के अनुसार, महर्षि वाल्मीकि के पिता का नाम महर्षि प्रचेता और माता का नाम चर्षणी बताया जाता है। उनके जीवन से जुड़ी विभिन्न परंपराओं में नामों के अलग-अलग उल्लेख भी मिलते हैं।

महर्षि वाल्मीकि जयंती आश्विन मास की शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर मनाई जाती है। यह दिन उनके महान साहित्यिक और आध्यात्मिक योगदान को याद करने तथा उनके आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण अवसर है।

सामाजिक और सांस्कृतिक संदेश

इस आयोजन के माध्यम से समाज में धार्मिक और सांस्कृतिक चेतना जागृत करने तथा महर्षि वाल्मीकि के आदर्शों, विचारों और शिक्षाओं के प्रचार-प्रसार का संदेश दिया गया। उपस्थित लोगों ने उनके बताए आदर्श मार्ग पर चलकर समाज में नैतिकता, सद्भाव, संस्कार और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देने का आह्वान किया।

डॉ. रामबाबू मिश्र
जिला संयोजक, संस्कृत भारती
जिला मुंगेली, छत्तीसगढ़।

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