“लकड़ी की मेज पर बैठने वाला रमन ऐसे बना डॉ. रमन” — शिक्षक दिवस पर पुरानी यादें साझा कर भावुक हुए डॉ. रमन

रायपुर, 5 सितंबर:शिक्षक दिवस के विशेष अवसर पर आज  डॉ. रमन सिंह ने अपने स्कूली दिनों के गुरुओं को याद करते हुए एक अत्यंत भावुक संदेश साझा किया है। लंबे समय के बाद अपनी पसंदीदा शिक्षिका से हुई मुलाकात ने उनके बचपन की पुरानी स्मृतियों को एक बार फिर ताजा कर दिया है।डॉ. रमन ने अपने संदेश में विशेष रूप से अपनी केमिस्ट्री की शिक्षिका आदरणीय कुमुदनी वैष्णव मैडम का आभार व्यक्त किया। उन्होंने याद किया कि स्कूल के दिनों में अणु-परमाणु की क्लास और पीरियोडिक टेबल (Periodic Table) याद करना बेहद कठिन काम लगता था, लेकिन कुमुदनी मैडम के अनूठे प्रोत्साहन और सरल शिक्षण शैली ने मुश्किल से मुश्किल सवालों को चुटकियों में आसान बना दिया।शिक्षिका के साथ हुए इस सुखद संवाद के दौरान स्कूल के अन्य मार्गदर्शक भी याद किए गए। डॉ. रमन ने हिंदी के “झा सर” को याद किया जो हमेशा व्याकरण की शुद्धता और भाषा के अनुशासन पर जोर देते थे। साथ ही, फिजिक्स के अध्यापक “श्याम सुंदर चटर्जी सर” का भी जिक्र हुआ, जिन्होंने केवल किताबों तक सीमित न रहकर प्रैक्टिकल और व्यावहारिक ढंग से गुरुत्वाकर्षण (Gravity) के सिद्धांतों को छात्रों के दिमाग में उतारा था।अपने संदेश के अंत में शीश झुकाकर नमन करते हुए डॉ. रमन ने कहा, “आप सभी अध्यापकों के कठिन परिश्रम और सही मार्गदर्शन का ही यह परिणाम है कि क्लास में लकड़ी की मेज पर बैठने वाला ‘रमन’ आज आगे बढ़कर ‘डॉ. रमन’ बन पाया है।”यह संस्मरण सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग गुरु-शिष्य के इस अनूठे व पावन रिश्ते की सराहना कर रहे हैं।

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