लखनपुर CHC में प्रशिक्षुओं से दवा वितरण का आरोप, वीडियो सामने आने के बाद मचा हड़कंप

जियाउल खान,लखनपुर / सरगुजा


  • ओपीडी में फार्मासिस्ट की मौजूदगी पर सवाल, BMO बोलेफार्मासिस्ट की निगरानी में ही हो दवा वितरण

लखनपुर। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लखनपुर में मरीजों को दवा वितरण से जुड़ा एक वीडियो सामने आने के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि एक निजी प्रशिक्षण संस्थान के प्रशिक्षणार्थियों से ओपीडी में मरीजों को दवाइयां वितरित कराई जा रही हैं।

जानकारी के मुताबिक, प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे बच्चों को अस्पताल की कार्यप्रणाली समझने और सीखने के उद्देश्य से अस्पताल में लगाया गया है। आरोप है कि इन प्रशिक्षणार्थियों से ओपीडी में दवा वितरण के साथ-साथ मरीजों को इंजेक्शन लगाने जैसे कार्य भी कराए जा रहे हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में दो फार्मासिस्ट पदस्थ होने के बावजूद ओपीडी में दवा वितरण के दौरान उनकी मौजूदगी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। यदि प्रशिक्षु किसी दवा की पहचान या उपयोग को लेकर भ्रमित होते हैं, तो मरीज की सुरक्षा के लिहाज से इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी—यह सवाल अब चर्चा का विषय बन गया है।

प्रशिक्षणार्थियों से बातचीत में यह बात सामने आने का दावा किया गया कि उन्हें स्वास्थ्य विभाग के एक कर्मचारी द्वारा ओपीडी और आईपीडी में अलग-अलग कार्यों की जिम्मेदारी दी गई है। जिस दवा के संबंध में उन्हें जानकारी होती है, उसका वितरण करने और जानकारी न होने पर फार्मासिस्ट से पूछने की बात भी सामने आई है।

BMO ने क्या कहा?

इस पूरे मामले में खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. ओपी प्रसाद ने स्पष्ट किया कि मरीजों को दवा का वितरण फार्मासिस्ट की देखरेख में होना चाहिए।

उन्होंने बताया कि फार्मासिस्ट अमित सिसोदिया और मंजू भारद्वाज को निर्देशित किया गया है कि वे अपनी निगरानी में दवा का वितरण सुनिश्चित करें।

BMO के अनुसार, नर्सों द्वारा प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे बच्चों को इंजेक्शन लगाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। वहीं दवा वितरण को लेकर फार्मासिस्टों की जिम्मेदारी तय की गई है।

व्यवस्था सुधार की मांग

मरीजों के इलाज और दवा वितरण जैसे संवेदनशील कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही सीधे मरीजों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में स्थानीय लोगों ने अस्पताल प्रबंधन से व्यवस्था को दुरुस्त करने और प्रशिक्षुओं से कराए जा रहे कार्यों की स्पष्ट निगरानी सुनिश्चित करने की मांग की है।

अब सवाल यह है कि प्रशिक्षणार्थियों को अस्पताल में प्रशिक्षण देने की प्रक्रिया के दौरान उनकी जिम्मेदारियां और निगरानी किस स्तर पर तय की गई हैं और मरीजों की सुरक्षा के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा कौन-कौन से प्रोटोकॉल लागू किए गए हैं।

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