लगातार आगजनी के बाद भी नहीं जागा प्रशासन, दो घंटे देरी से पहुंची फायर ब्रिगेड

संदीप यादव मुंगेली। जिले में लगातार सामने आ रही आगजनी की घटनाओं के बावजूद प्रशासन की व्यवस्थाओं पर सवाल उठने लगे हैं। शहर में पहले भी आग लगने की कई बड़ी घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन इसके बाद भी अग्निशमन व्यवस्था को लेकर ठोस कदम नहीं उठाए जाने से लोगों में नाराजगी है। ताजा मामला दाऊपारा स्थित दुबे मोबाइल दुकान का है, जहां आग लगने के बाद फायर ब्रिगेड की टीम करीब दो घंटे की देरी से पहुंची। इस दौरान आग ने दुकान में रखा सामान अपनी चपेट में ले लिया।

शहर से दूर खड़ी रहती है दमकल की वाहन

स्थानीय नागरिकों के अनुसार, इससे पहले पूनम जनरल स्टोर में भी भीषण आग लगी थी। उस समय फायर ब्रिगेड के देर से पहुंचने को लेकर लोगों ने नाराजगी जताई थी। घटना के बाद जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की ओर से शहर की अग्निशमन व्यवस्था को बेहतर करने तथा फायर ब्रिगेड को शहर के नजदीक रखने की बात कही गई थी। लोगों को उम्मीद थी कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा नहीं बनेगी।

इसके बाद करीब दो माह पूर्व गुरुकृपा मोबाइल दुकान में आग लगने की घटना सामने आई थी। उस समय भी फायर ब्रिगेड के समय पर नहीं पहुंचने का मुद्दा उठा था। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने व्यवस्था में सुधार करने और फायर ब्रिगेड की पहुंच का समय कम करने की बात कही थी। बताया गया था कि फायर ब्रिगेड की गाड़ी शहर से करीब 6 किलोमीटर दूर लालाकापा में खड़ी रहती है, जिससे आपात स्थिति में मुंगेली पहुंचने में समय लग जाता है।

विगत माह घटित घटना से सबब नहीं ली गई

स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछली घटनाओं के बाद शहर में फायर ब्रिगेड के लिए नगर पालिका क्षेत्र में ही उचित स्थान तय करने की बात कही गई थी, ताकि आगजनी की सूचना मिलते ही टीम तत्काल मौके पर पहुंच सके। लेकिन बुधवार को दुबे मोबाइल दुकान में हुई आग की घटना में करीब दो घंटे की देरी ने पुराने दावों और वादों की पोल खोल दी।

नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि फायर ब्रिगेड को शहर के भीतर या नजदीकी स्थान पर स्थायी रूप से तैनात किया जाए और आगजनी की घटनाओं से निपटने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाई जाए। लोगों का कहना है कि आग लगने के बाद कुछ मिनट भी बेहद महत्वपूर्ण होते हैं, ऐसे में दो घंटे की देरी से बड़ा नुकसान होने की आशंका बनी रहती है। अब देखना होगा कि इस घटना के बाद प्रशासन वास्तव में कोई ठोस कदम उठाता है या फिर मामला आश्वासन तक ही सीमित रह जाता है।

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