
बलौदाबाजार जिले के सिमगा में गणेश विसर्जन के दौरान हुए विवाद के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया। पुलिस कार्रवाई के विरोध में कांग्रेस-भाजपा समेत विभिन्न दलों के कार्यकर्ता धरने पर बैठ गए।9-10 घंटे चला प्रदर्शन अधिकारीयों के आश्वाशन के बाद ख़त्म कर दिया गया है।
प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर लोगों के साथ मारपीट और लाठीचार्ज कर भीड़ को खदेड़ने का आरोप लगाया। विरोध में सिमगा बंद का आह्वान किया गया था। प्रदर्शन में नगर पालिका अध्यक्ष राजू भाटिया समेत स्थानीय जनप्रतिनिधि और अन्य लोग शामिल रहे।
10 घंटे चली विसर्जन यात्रा, चौक पर घंटों रुकी झांकी
बताया गया कि गणेश प्रतिमा की विसर्जन यात्रा करीब 10 घंटे चली। घाट पहुंचने से पहले सिमगा चौक पर एक झांकी करीब 2 से 3 घंटे तक रुकी रही। इससे चौक पर सड़क जाम हो गया और पीछे चल रहे अन्य लोगों व समितियों को आगे बढ़ने में परेशानी हुई।
इसके बाद पुलिस ने भीड़ हटाने और रास्ता खाली कराने की कोशिश की। इसी दौरान पुलिस और लोगों के बीच विवाद बढ़ने की बात सामने आई।
पुलिस पर पार्षदों से मारपीट और लाठीचार्ज का आरोप
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि रास्ता खाली कराने के दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज कर लोगों को खदेड़ा। उनका यह भी आरोप है कि इस कार्रवाई में तीन पार्षदों के साथ मारपीट की गई।
पीड़ित पक्ष की ओर से SDOP तारेश साहू और थाना प्रभारी धीरेंद्र दुबे पर भी मारपीट के आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि तीनों पार्षदों को दौड़ाकर पीटा गया। घटना के बाद स्थानीय लोग और कार्यकर्ता पुलिस कार्रवाई के विरोध में एकजुट हो गए।
सिमगा चौक पर धरना और चक्काजाम
पुलिस कार्रवाई के विरोध में बड़ी संख्या में लोग सिमगा चौक पर जमा हुए और सड़क पर बैठकर चक्काजाम कर दिया। इससे कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित रहा और इलाके में तनाव की स्थिति बनी।
इसके बाद विभिन्न दलों के कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने धरना दिया। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि गणेश विसर्जन के दौरान हुई घटना की निष्पक्ष जांच की जाए और मारपीट के आरोपों पर कार्रवाई की जाए।
बंद के आह्वान का बाजार पर असर
घटना के विरोध में स्थानीय लोगों ने सिमगा बंद का आह्वान किया। इसके चलते कई बाजारों में दुकानें बंद रहीं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पुलिस की कार्रवाई की जांच होनी चाहिए और दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई की जाए।
थाना प्रभारी बोले- लाठीचार्ज नहीं, सिर्फ रास्ता खाली कराया

वहीं, थाना प्रभारी धीरेंद्र दुबे ने लाठीचार्ज और मारपीट के आरोपों को गलत बताया। उन्होंने कहा कि गणेश समितियों के बीच आगे निकलने की होड़ के कारण चौक पर घंटों रास्ता जाम हो गया था।
उनके मुताबिक, आर्यन ग्रुप आगे नहीं बढ़ रहा था, जिसके कारण पीछे चल रहे लोगों को परेशानी हो रही थी। पुलिस ने सिर्फ रास्ता खाली कराने के लिए लोगों को वहां से हटाया। उन्होंने कहा कि न तो मारपीट की गई और न ही लाठीचार्ज हुआ।
थाना प्रभारी ने कहा कि पूरी घटना की स्थिति CCTV फुटेज से देखी जा सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर पुलिस मौके पर लोगों को नहीं हटाती तो विवाद और बड़ा हो सकता था।








