भाटापारा। कृषि उपज मंडी के पूर्व अध्यक्ष एवं कांग्रेस नेता सुशील शर्मा ने गर्मी में धान उत्पादन नहीं करने संबंधी कथित चेतावनी को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के नौकरशाहों द्वारा भाटापारा विधानसभा क्षेत्र में शिवनाथ नदी किनारे बसे गांवों के किसानों को गर्मी में धान उत्पादन नहीं करने की चेतावनी देना किसानों के साथ अन्याय है। किसान इस कथित तुगलकी फरमान को स्वीकार नहीं करेंगे और अपने खेतों में रवि फसल का उत्पादन जारी रखेंगे।
सुशील शर्मा ने कहा कि किसान पहले भी अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करते रहे हैं और आगे भी किसी दबाव में नहीं आएंगे। किसानों को वर्तमान में धान की फसल के लिए एक पानी की तत्काल आवश्यकता है, लेकिन बिजली विभाग द्वारा लगातार विद्युत आपूर्ति बाधित किए जाने से किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों को पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराने के बजाय उनकी फसल के उत्पादन पर रोक लगाने की चेतावनी देना दुर्भाग्यपूर्ण है।
किसानों की आर्थिक स्थिति को समझे सरकार
पूर्व मंडी अध्यक्ष ने कहा कि आज किसान कर्ज के बोझ से दबा हुआ है। सोसायटी का कर्ज, ट्रैक्टर का कर्ज और पारिवारिक जिम्मेदारियों का निर्वहन किसान अपनी फसल बेचकर ही करता है। ऐसे में गर्मी की धान की फसल किसानों के लिए आर्थिक सहारा होती है।
उन्होंने कहा कि इस वर्ष गंगरेल बांध के पानी से फसल को हुए नुकसान की भरपाई के लिए सरकार ने अब तक किसानों को क्षतिपूर्ति मुआवजा नहीं दिया है। वहीं, फसल बीमा योजना में फसल के डूबान से हुए नुकसान की क्षतिपूर्ति का भी कोई प्रावधान नहीं होने से किसान आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।
सुशील शर्मा ने कहा कि गर्मी में धान उत्पादन से पोहा मिलों एवं कृषि उपज मंडियों का संचालन होता है। इससे हजारों हमाल, रेजा एवं मजदूरों को रोजगार मिलता है और उनके परिवारों का जीवनयापन होता है। यदि गर्मी में धान उत्पादन पर रोक लगाई जाती है, तो किसानों के साथ-साथ मजदूरों एवं व्यापारियों की आजीविका भी प्रभावित होगी।
सीमेंट कारखानों को पानी, किसानों पर पाबंदी क्यों?
सुशील शर्मा ने आरोप लगाया कि एक तरफ शिवनाथ नदी का पानी बड़े-बड़े सीमेंट कारखानों, स्पंज आयरन प्लांटों एवं मछली पालन करने वाले ठेकेदारों को उपलब्ध कराया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ अन्नदाता किसानों को रवि फसल के उत्पादन पर रोक लगाने की चेतावनी दी जा रही है।
उन्होंने कहा कि यह किसानों के साथ विश्वासघात और अन्याय है। सरकार को किसानों की समस्याओं को समझते हुए उनके हित में निर्णय लेना चाहिए।
उन्होंने भाजपा सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि यदि सरकार में गर्मी के धान उत्पादन पर रोक लगाने का निर्णय लेने का साहस है, तो वह किसानों के लिए लिखित आदेश जारी करे। किसानों को मौखिक चेतावनी देकर डराने का प्रयास नहीं किया जाना चाहिए।
धान खरीदी की तारीख को लेकर भी भाजपा पर साधा निशाना
पूर्व मंडी अध्यक्ष सुशील शर्मा ने भाजपा पर दोहरी नीति अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि जब भाजपा विपक्ष में थी, तब धान खरीदी 1 नवंबर से शुरू करने की मांग जोर-शोर से करती थी, लेकिन आज सत्ता में आने के बाद इस मुद्दे पर मौन है।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार द्वारा धान खरीदी 15 नवंबर से शुरू करने का निर्णय किसानों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है। इससे किसानों को मजबूरी में अपनी धान की उपज कम कीमत पर बेचनी पड़ रही है।
सुशील शर्मा ने कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने किसानों की धान खरीदी 1 नवंबर से शुरू की थी। गर्मी की रवि फसल आने से कृषि उपज मंडियों में चहल-पहल रहती थी और किसान, मजदूर एवं व्यापारी सभी को आर्थिक लाभ मिलता था।
उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान भाजपा सरकार के नौकरशाह किसानों को गर्मी में धान उत्पादन करने से रोकने की चेतावनी दे रहे हैं, जो किसानों के साथ अन्याय है।
बिजली की समस्या से किसान परेशान
सुशील शर्मा ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि किसानों के विद्युत कनेक्शन कई हिस्सों में बांट दिए गए हैं। पर्याप्त बिजली आपूर्ति नहीं होने के कारण किसानों को सिंचाई में परेशानी हो रही है।
उन्होंने कहा कि किसानों को समय पर बिजली उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। पर्याप्त बिजली नहीं मिलने से फसल की पैदावार प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है। सरकार को किसानों की समस्याओं का समाधान करना चाहिए, न कि उनकी खेती पर रोक लगाने की चेतावनी देनी चाहिए।
लिखित आदेश जारी होने पर करेंगे आंदोलन
सुशील शर्मा ने कहा कि गर्मी में धान उत्पादन पर रोक लगाने संबंधी कथित चेतावनी का कांग्रेस पुरजोर विरोध करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसान अपने खेतों में रवि फसल का उत्पादन जारी रखेंगे और किसी भी प्रकार के दबाव में नहीं आएंगे।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार के नौकरशाह गर्मी में धान उत्पादन पर रोक लगाने का लिखित आदेश जारी करते हैं, तो इसके विरोध में धरना-प्रदर्शन एवं आंदोलन किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि जब तक सरकार लिखित आदेश जारी नहीं करती, तब तक किसान गर्मी में धान की फसल का उत्पादन करते रहेंगे। किसानों के अधिकारों और उनकी आजीविका की रक्षा के लिए कांग्रेस लगातार संघर्ष करती रहेगी।
सुशील शर्मा ने कहा कि किसानों के हितों के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और गर्मी में धान उत्पादन पर रोक लगाने के किसी भी प्रयास का पुरजोर विरोध किया जाएगा।






