38 करोड़ की लागत से बनेगा रिंगनी रेलवे ओवरब्रिज, सितंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य

रेलवे फाटक पर जाम से मिलेगी राहत, 962 मीटर लंबे ओवरब्रिज से हजारों लोगों का सफर होगा आसान

बलौदाबाजार। बलौदाबाजार-सिमगा मार्ग पर हथबंद के पास ग्राम रिंगनी में मुंबई-हावड़ा मुख्य रेल मार्ग पर रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) का निर्माण कार्य तेजी से जारी है। लगभग 38 करोड़ रुपये की लागत से 962 मीटर लंबे इस ओवरब्रिज का निर्माण किया जा रहा है। इसके पूरा होने से रेलवे फाटक पर लगने वाले लंबे जाम से लोगों को राहत मिलेगी और क्षेत्र में आवागमन सुगम होगा। परियोजना को सितंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

भारी वाहनों के दबाव से मिलेगी राहत

सिमगा विकासखंड में कई सीमेंट संयंत्र और स्टील प्लांट संचालित हैं। इसके चलते बलौदाबाजार-सिमगा मार्ग पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में भारी मालवाहक वाहनों का आवागमन होता है। जानकारी के अनुसार, इस मार्ग से रोजाना एक हजार से अधिक भारी ट्रक और अन्य वाहन गुजरते हैं। रेलवे फाटक बंद होने के दौरान वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं, जिससे आम यात्रियों और व्यापारिक गतिविधियों को परेशानी होती है।

इस मार्ग का उपयोग सुहेला और हथबंद क्षेत्र की 80 से अधिक ग्राम पंचायतों के लोग तहसील एवं ब्लॉक मुख्यालय पहुंचने के लिए करते हैं। ओवरब्रिज बनने से ग्रामीणों, कर्मचारियों, व्यापारियों और उद्योगों से जुड़े लोगों को आवागमन में सुविधा मिलने की उम्मीद है।

962 मीटर लंबा होगा ओवरब्रिज

सेतु निगम के सब इंजीनियर मुकेश देवांगन के अनुसार, ओवरब्रिज में कुल 26 कॉलम बनाए जाएंगे। इनमें एप्रोच रोड सहित 23 कॉलमों का निर्माण सेतु निगम द्वारा गुजरात की बैक बोन कंस्ट्रक्शन कंपनी के माध्यम से कराया जा रहा है। वहीं, रेलवे ट्रैक के ऊपर स्थित तीन मुख्य कॉलमों का निर्माण रेलवे विभाग करेगा। परियोजना को सितंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

जनप्रतिनिधियों के प्रयास से मिली स्वीकृति

रिंगनी रेलवे ओवरब्रिज क्षेत्र की लंबे समय से चली आ रही मांग रही है। इस परियोजना की स्वीकृति और निर्माण में प्रदेश के कैबिनेट मंत्री टंकराम वर्मा तथा राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा की पहल को महत्वपूर्ण बताया गया है। ओवरब्रिज का वर्चुअल भूमिपूजन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया था।

निर्माण पूरा होने के बाद बलौदाबाजार और सिमगा क्षेत्र के लोगों को रेलवे फाटक पर लगने वाले जाम से राहत मिलने के साथ ही औद्योगिक परिवहन को भी गति मिलने की उम्मीद है। इससे क्षेत्र में आवागमन और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है।

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