भाटापारा। वाहन ऋण की 80 प्रतिशत किस्तों का भुगतान करने के बावजूद ग्राहक की गाड़ी जब्त कर बेचने के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, बलौदाबाजार ने चोलामंडलम इन्वेस्टमेंट एंड फाइनेंस कंपनी लिमिटेड, रायपुर को सेवा में कमी का दोषी ठहराया है। आयोग ने कंपनी को पीड़ित ग्राहक बिहारी यदु को कुल 5.19 लाख रुपये से अधिक की राशि 45 दिनों के भीतर लौटाने का आदेश दिया है। साथ ही वाहन ऋण खाता बंद करने और अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) जारी करने के निर्देश भी दिए हैं।
मामला भाटापारा निवासी बिहारी यदु का है, जिन्होंने चोलामंडलम फाइनेंस कंपनी से वाहन खरीदने के लिए ऋण लिया था। निर्धारित शर्तों के अनुसार, वे ऋण की 80 प्रतिशत किस्तों का भुगतान कर चुके थे। इसके बावजूद कंपनी ने कथित तौर पर बिना पूर्व सूचना और वैध कानूनी नोटिस दिए उनका वाहन जब्त कर बेच दिया। पीड़ित ने वाहन वापस करने अथवा उचित क्षतिपूर्ति देने की मांग की, लेकिन कंपनी के अधिकारियों ने उनकी शिकायत स्वीकार नहीं की। इसके बाद उन्होंने जिला उपभोक्ता आयोग में परिवाद दायर किया।
वैध नोटिस के बिना वाहन जब्त करना सेवा में कमी
मामले की सुनवाई आयोग की अध्यक्ष रंजना दत्ता तथा सदस्य हरजीत सिंह चावला और शारदा सोनी की पीठ ने की। सुनवाई के दौरान प्रस्तुत दस्तावेजों और संबंधित तथ्यों की जांच की गई। आयोग ने पाया कि कंपनी वाहन जब्ती के संबंध में वैध नोटिस देने का प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सकी। सर्वे किए जाने के संबंध में भी केवल मौखिक दावा किया गया था।
आयोग ने कंपनी की इस कार्रवाई को गंभीर लापरवाही और सेवा में कमी मानते हुए ग्राहक को क्षतिपूर्ति देने का आदेश सुनाया।
5.19 लाख रुपये से अधिक का भुगतान करने का आदेश
आयोग के आदेश के अनुसार, जब्त वाहन को 6.75 लाख रुपये में बेचे जाने की राशि को ऋण की बकाया देनदारी में समायोजित किया जाएगा। इसके बाद शेष अंतर राशि 4.62 लाख रुपये पीड़ित ग्राहक को लौटाने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके अतिरिक्त मानसिक परेशानी के लिए 25 हजार रुपये, आर्थिक क्षतिपूर्ति के लिए 25 हजार रुपये और वाद व्यय के रूप में 7 हजार रुपये देने का आदेश दिया गया है। इस प्रकार कंपनी को कुल 5.19 लाख रुपये का भुगतान करना होगा।
लोन खाता बंद करने और एनओसी जारी करने के निर्देश
आयोग ने कंपनी को निर्धारित समयसीमा के भीतर भुगतान करने के साथ ही वाहन ऋण खाता तत्काल बंद करने और ग्राहक को एनओसी जारी करने का निर्देश दिया है। साथ ही स्पष्ट किया है कि कंपनी भविष्य में इस ऋण के संबंध में किसी प्रकार का अतिरिक्त ब्याज या पेनाल्टी नहीं वसूल सकेगी।
आयोग के इस फैसले से वाहन ऋण लेने वाले उपभोक्ताओं के अधिकारों और वित्तीय संस्थानों की जवाबदेही का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है।








