राजनांदगांव : जर्जर भवन में सरकारी दफ्तर, हादसे का इंतजार या प्रशासन की अनदेखी?

विश्वनाथ देवांगन ,राजनांदगांव ,छत्तीसगढ़।संस्कारधानी राजनांदगांव में एक बार फिर सरकारी व्यवस्था और सुरक्षा को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। शहर में एक ऐसा सरकारी भवन सामने आया है, जिसकी हालत बेहद जर्जर हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद इसी भवन में आज भी सरकारी दफ्तर का संचालन किया जा रहा है। सवाल यह है कि आखिर जिम्मेदार अधिकारी किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार क्यों कर रहे हैं?

बीते दिनों दिल्ली में जर्जर इमारत गिरने से हुए हादसे के बाद देशभर में पुराने और जर्जर भवनों के निरीक्षण को लेकर प्रशासन सक्रिय नजर आया। कई जगहों पर ऐसे भवनों की स्थिति की जांच की जा रही है, ताकि समय रहते किसी संभावित हादसे को रोका जा सके। लेकिन राजनांदगांव में तस्वीर कुछ अलग नजर आ रही है।

शहर के सीएमएचओ कार्यालय के जर्जर भवन की खबर हम पहले भी कई बार सामने ला चुके हैं। भवन की हालत ऐसी है कि जगह-जगह से छत और प्लास्टर का हिस्सा गिरने की बात सामने आती रही है। इसके बावजूद यहां रोजाना अधिकारी, कर्मचारी और अपनी समस्याओं को लेकर आने वाले आम लोग पहुंच रहे हैं।

ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब भवन की स्थिति जिम्मेदारों के सामने है, तो अब तक इसके मेंटेनेंस की ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की गई? अगर भवन मरम्मत के लायक नहीं है तो इसे सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने या डिस्मेंटल करने की कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही?

क्योंकि जर्जर भवन सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि यहां काम करने वाले कर्मचारियों और रोजाना आने वाले लोगों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला है। अगर अचानक भवन का कोई हिस्सा गिर जाता है और कोई बड़ा हादसा हो जाता है, तो इसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी?

क्या प्रशासन किसी दुर्घटना के बाद जागेगा या उससे पहले इस जर्जर भवन को लेकर कोई ठोस कदम उठाया जाएगा? यह सवाल अब जिम्मेदार अधिकारियों से पूछा जाना जरूरी है।

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