विकास सिन्हा , कांकेर ।आस्था और उमंग का पावन अवसर:-छत्तीसगढ़ की पावन धरा अपनी समृद्ध जनजातीय संस्कृति, अटूट लोक आस्था और अनूठे पर्व-त्योहारों के लिए विश्व भर में विख्यात है। इसी गौरवशाली परंपरा की एक जीवंत बानगी आज विकासखंड कांकेर, जिला कांकेर के अंतर्गत आने वाले ग्राम मरकाटोला (फत्तेचंद) में देखने को मिली। ग्राम मरकाटोला में स्थित ग्राम ठाकुर श्री छबीलाल हिचामी (जागा भूमियार) एवं माता तोमडोकरी खुंदा के पावन सानिध्य में आज ‘ठाकुर जोहरनी’ का कार्यक्रम अत्यंत हर्षोल्लास, गरिमा और पारंपरिक उमंग के साथ संपन्न हुआ। इस विशेष अवसर पर न केवल धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए, बल्कि समाज को एक सूत्र में पिरोने वाले वैचारिक संवाद और सम्मान समारोह का भी अनूठा संगम देखने को मिला।
12 भाई बिरादरी की सहभागिता:- सामाजिक एकजुटता का प्रमाण इस भव्य आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता 12 भाई बिरादरी और समस्त ग्रामवासियों की सामूहिक सहभागिता रही। छत्तीसगढ़ के पारंपरिक समाज में ’12 भाई बिरादरी’ का स्थान अत्यंत सम्मानित और महत्वपूर्ण माना जाता है। यह बिरादरी आपसी सहयोग, न्याय और सामाजिक ताने-बाने को सुदृढ़ बनाए रखने का काम करती है। आज के कार्यक्रम में बिरादरी के सयानों, बुजुर्गों, युवाओं और मातृशक्ति ने सामूहिक रूप से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। सभी ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार माटी की पूजा-अर्चना की और ठाकुर देव व माता तोमडोकरी खुंदा से गांव की सुख, समृद्धि, खुशहाली और अच्छी फसल की कामना की।

कार्यक्रम का एक मुख्य आकर्षण सामाजिक सद्भाव और समरसता को लेकर हुआ वैचारिक संवाद रहा। वर्तमान समय में जहां आधुनिकता के कारण दूरियां बढ़ रही हैं, वहीं मरकाटोला की इस पावन भूमि पर समाज के प्रबुद्ध जनों ने एक मंच पर बैठकर इस बात पर गहन चर्चा की कि किस तरह अपनी रूढ़ि-परंपराओं को अक्षुण्ण रखते हुए आपसी भाईचारे को मजबूत किया जाए।
संवाद के दौरान वक्ताओं ने रेखांकित किया कि ‘ठाकुर जोहरनी’ केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह सामाजिक समरसता का आधार स्तंभ है। इसके साथ ही, समाज और गांव के विकास में उत्कृष्ट योगदान देने वाले वरिष्ठ नागरिकों, सयानों और सेवादारों का विशेष सम्मान किया गया। इस सम्मान ने नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और समाज के प्रति कर्तव्यों को समझने की एक नई प्रेरणा दी।
‘ठाकुर जोहरनी’ छत्तीसगढ़ के बस्तर और कांकेर अंचल की एक बेहद प्राचीन और पवित्र परंपरा है। इसके महत्व और विशेषताओं को निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से समझा जा सकता है-
माटी और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता:- यह पर्व मूल रूप से प्रकृति, भूमि (माटी) और ग्राम देवता (ठाकुर देव) के प्रति आभार प्रकट करने का जरिया है। जागा भूमियार के सानिध्य में होने वाली यह पूजा इस बात का प्रतीक है कि मनुष्य का अस्तित्व इस प्रकृति और माटी से ही है।
जोहारने (अभिवादन) की परंपरा:- ‘जोहरनी’ शब्द ‘जोहार’ से बना है, जिसका अर्थ होता है सम्मानपूर्वक अभिवादन करना। इस दिन छोटे अपनों से बड़ों का, और पूरा गांव अपने ग्राम देवताओं व सयानों का ‘जोहार’ कर आशीर्वाद लेता है। यह आपसी कटुता को मिटाकर प्रेम बांटने का दिन है।
समानता का संदेश:- इस आयोजन में ऊंच-नीच, अमीर-गरीब का कोई भेद नहीं होता। राजा से लेकर रंक तक और 12 भाई बिरादरी के सभी लोग एक ही कतार में बैठकर प्रसाद ग्रहण करते हैं और चर्चा करते हैं।
सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण:- इस प्रकार के आयोजन लोक वाद्य यंत्रों, पारंपरिक गीतों और पुरखों के रीति-रिवाजों को जीवित रखने का सबसे सशक्त माध्यम हैं।
ग्राम मरकाटोला (फत्तेचंद) में आयोजित इस सफल कार्यक्रम ने संपूर्ण कांकेर जिले और छत्तीसगढ़ समाज को एक बेहद सशक्त संदेश दिया है। आज के इस आयोजन का संदेश स्पष्ट है- “हमारी संस्कृति ही हमारी शक्ति है।”
अखंडता का संदेश:- जब 12 भाई बिरादरी के लोग एक जगह एकत्रित होते हैं, तो यह समाज की उस अखंडता को दर्शाता है जिसे कोई बाहरी ताकत नहीं तोड़ सकती।
युवा पीढ़ी को प्रेरणा:- इस सफल कार्यक्रम के माध्यम से गांव के युवाओं को अपनी जड़ों से जुड़े रहने का संदेश मिला है। उन्हें यह सीख मिली है कि आधुनिक युग में आगे बढ़ते हुए भी अपनी माटी की खुशबू और पुरखों के सिद्धांतों को कभी नहीं भूलना चाहिए।
सद्भाव से ही विकास:- संवाद के दौरान यह बात उभरकर सामने आई कि किसी भी गांव या समाज का विकास तभी संभव है, जब वहां आंतरिक शांति और सामाजिक सद्भाव हो।
संक्षेप में कहें तो, आज ग्राम मरकाटोला (फत्तेचंद) में ग्राम ठाकुर श्री छबीलाल हिचामी (जागा भूमियार) और माता तोमडोकरी खुंदा के यहाँ आयोजित ‘ठाकुर जोहरनी’ का कार्यक्रम पूरी तरह से अनुकरणीय और ऐतिहासिक रहा। इसने सिद्ध कर दिया कि लोक-परंपराएं केवल अतीत की बातें नहीं हैं, बल्कि वे वर्तमान समाज को अनुशासित और प्रेमपूर्ण बनाए रखने का सबसे बड़ा जरिया हैं। समस्त ग्रामवासियों और 12 भाई बिरादरी के सामूहिक प्रयासों से संपन्न हुआ यह संवाद और सम्मान समारोह आने वाले समय में सामाजिक समरसता की एक नई मिसाल पेश करेगा। ठाकुर देव और माता तोमडोकरी खुंदा का आशीर्वाद इस अंचल पर सदैव बना रहे और आपसी भाईचारे की यह ज्योत सदा जलती रहे, यही इस सफल आयोजन की सबसे बड़ी सार्थकता है।
इस अवसर पर ग्राम सरपंच श्री मिथलेश कावड़े, उपसरपंच श्री प्रिंस पाण्डेय जी,ग्राम गायता छन्नू हिचामी,श्री रजऊ हिचामी,ग्राम पटेल श्री शिव प्रसाद हिचामी,यादव समाज अध्यक्ष श्री चमन यादव, साहू समाज अध्यक्ष श्री देवेन्द्र साहू, कलार समाज संरक्षक श्री बिसाली सिन्हा,कोसारिया गांडा समाज संरक्षक श्री नरेन्द्र दीपक,ग्राम सभा अध्यक्ष श्री लच्छन नेताम जी,ग्राम विकास समिति के अध्यक्ष श्री श्याम साय दर्रो जी,निषाद समाज प्रमुख श्री हलाल निषाद, हल्बा समाज प्रमुख श्री जंगलू चिराम, भूतपूर्व सरपंच श्री सुमेरसिंह ध्रुवा,श्री घसिया हिचामी,श्रीमती पुष्पा हिचामी,भूतपूर्व सरपंच श्रीमती गायत्री हिचामी,श्रीमती रेखा हिचामी, श्री भारत हिचामी,सुश्री विनिता हिचामी,श्री सरजू नुरूटी, श्री रूपेश कुमेटी, श्री रामसाय दर्रो, श्री मेहतरू नेताम,श्री सुग्रीव हिचामी, श्री कमल हिचामी, श्री सगुन हिचामी, श्री संतु हिचामी, श्री देशी हिचामी, श्री प्रभू हिचामी एवं समस्त ग्राम वासी उपस्थित थे।








