मुंगेली सिटी कोतवाली पर गंभीर सवाल: आर्म्स एक्ट के आरोपी 4 घंटे थाने में बैठाने के बाद कैसे छूटे, अब फरार?

संदीप यादव मुंगेली। गंभीर अपराधों में आरोपियों की त्वरित गिरफ्तारी को लेकर पुलिस प्रशासन द्वारा लगातार निर्देश दिए जाने के बावजूद मुंगेली सिटी कोतवाली से जुड़ा एक मामला अब सवालों के घेरे में है। आरोप है कि आर्म्स एक्ट सहित गंभीर धाराओं में नामजद कुछ आरोपियों को पुलिस घेराबंदी कर थाने लाई, जहां उन्हें करीब चार घंटे तक बैठाए रखने के बाद छोड़ दिया गया। वर्तमान में संबंधित आरोपी पुलिस की नजर में फरार बताए जा रहे हैं।

मामला मुंगेली जिले के निरजाम ग्राम पंचायत से जुड़ा बताया जा रहा है, जहां सरपंच के साथ कथित विवाद और मारपीट के बाद पुलिस ने अपराध दर्ज किया। मामले में आर्म्स एक्ट की धारा 25 और 27 सहित अन्य धाराएं लगाए जाने की बात सामने आ रही है। हालांकि प्रकरण में दर्ज धाराओं, गिरफ्तारी की स्थिति और पुलिस कार्रवाई की वास्तविक जानकारी आधिकारिक रिकॉर्ड से स्पष्ट होना बाकी है।

गृह मंत्री तक पहुंचा मामला, कार्रवाई के बाद फिर छोड़े जाने का आरोप

सूत्रों के अनुसार, आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर मामला प्रदेश के गृह मंत्री विजय शर्मा के संज्ञान में पहुंचा था। इसके बाद पुलिस को आरोपियों के विरुद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए जाने की चर्चा है। आरोप है कि इसके बाद पुलिस ने जितेंद्र साहू सहित चार लोगों को घेराबंदी कर पकड़कर सिटी कोतवाली पहुंचाया। बताया जा रहा है कि आरोपियों को कई घंटे थाने में रखने के बाद उन्हें वहां से जाने दिया गया। इसके बाद अब वही आरोपी पुलिस रिकॉर्ड में फरार बताए जा रहे हैं। इस घटनाक्रम ने पुलिस की कार्यप्रणाली और गिरफ्तारी की प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

थाना प्रभारी के कथित बयान से बढ़े सवाल

पूरे मामले में सिटी कोतवाली थाना प्रभारी कार्तिकेश्वर जांगड़े के कथित बयान को लेकर भी चर्चा है। बताया जा रहा है कि थाना प्रभारी की ओर से यह कहा गया कि मामले को उच्च अधिकारियों के संज्ञान में लाने के बाद आरोपियों को थाने से जाने दिया गया और अगले दिन उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा। यदि यह कथन सही है, तो सवाल उठता है कि गंभीर धाराओं में दर्ज मामले के आरोपियों को थाने से छोड़े जाने का आधार क्या था? क्या इस संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों से विधिवत निर्देश प्राप्त किए गए थे? यदि निर्देश मिले थे तो उनकी प्रकृति और आधार क्या था? वहीं यदि ऐसा कोई निर्देश नहीं था तो आरोपियों को थाने से जाने देने की प्रक्रिया की जिम्मेदारी किसकी बनती है?

आर्म्स एक्ट की धाराएं, फिर गिरफ्तारी के बजाय रिहाई क्यों?

मामले में आर्म्स एक्ट की धारा 25 और 27 लगाए जाने की बात सामने आने के बाद पुलिस कार्रवाई पर और अधिक सवाल उठ रहे हैं। यदि जांच के दौरान आरोपियों के विरुद्ध गिरफ्तारी योग्य आधार मौजूद था, तो उन्हें थाने लाने के बाद छोड़ने की आवश्यकता क्यों पड़ी? क्या इस दौरान कानून में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया? क्या गिरफ्तारी नहीं करने अथवा आरोपियों को जाने देने के संबंध में कोई रिकॉर्ड तैयार किया गया? इन सवालों का जवाब पुलिस के आधिकारिक रिकॉर्ड और जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

धारा 354 की शिकायत का भी जिक्र

बताया जा रहा है कि संबंधित पक्ष की ओर से भारतीय दंड कानून की धारा 354 से संबंधित शिकायत भी की गई थी। हालांकि इस शिकायत की वर्तमान स्थिति, एफआईआर में शामिल धाराएं और पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई की आधिकारिक जानकारी सामने आना अभी बाकी है।

एसपी और आईजी की जांच से सामने आ सकता है पूरा सच

मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल अब यह है कि थाने में लाए गए आरोपियों को किन परिस्थितियों में छोड़ा गया और क्या इस पूरी कार्रवाई की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को थी। यदि वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर आरोपियों को छोड़ा गया था तो उसका स्पष्ट आधार सामने आना चाहिए। वहीं यदि पुलिस प्रक्रिया में किसी स्तर पर चूक हुई है तो उसकी जिम्मेदारी भी निर्धारित होना आवश्यक है।

अब निगाहें मुंगेली पुलिस अधीक्षक और संबंधित रेंज के वरिष्ठ अधिकारियों पर हैं कि क्या पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराई जाती है। जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपियों को थाने से छोड़े जाने के पीछे वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं, पुलिस ने कौन-सी कानूनी प्रक्रिया अपनाई और क्या किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन हुआ। फिलहाल आर्म्स एक्ट सहित गंभीर धाराओं के मामले में आरोपियों को थाने लाए जाने, कई घंटे रखने और उसके बाद छोड़ दिए जाने तथा वर्तमान में उनके फरार बताए जाने की घटना ने सिटी कोतवाली की कार्रवाई पर गंभीर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।

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