संदीप यादव मुंगेली। प्रदेश में चल रहे विभिन्न अभियानों की तरह मुंगेली जिले ने एक बार फिर अग्रणी स्थान हासिल कर प्रदेश में अपनी अलग पहचान बनाई है। इसी क्रम में प्रदेशव्यापी साइबर जागृति अभियान में एसएसपी भोजराम पटेल के कुशल मार्गदर्शन में मुंगेली पुलिस की टीम ने बेहतर कार्य करते हुए पूरे प्रदेश में पांचवां स्थान प्राप्त किया है।
आज के इस डिजिटल दौर में मोबाइल और इंटरनेट जहां आम लोगों की दिनचर्या को आसान बना रहे हैं, वहीं साइबर अपराध के नए-नए तौर-तरीके भी बड़ी चुनौती बन रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ पुलिस मुख्यालय द्वारा चलाए गए राज्यव्यापी साइबर जागृति अभियान के तहत जिला मुंगेली में 15 अगस्त से 2 अक्टूबर तक सात सप्ताह का व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया गया। पूरे प्रदेश के 34 जिलों में मुंगेली ने 5वां स्थान हासिल किया। एसएसपी भोजराम पटेल के कुशल नेतृत्व व जिले की पुलिस टीम के अथक प्रयासों के चलते मुंगेली जिले ने पूरे प्रदेश में अपनी मजबूत छाप छोड़ी है।
एसएसपी भोजराम पटेल के निर्देशन में मुंगेली पुलिस द्वारा साइबर सुरक्षा को केवल एक वर्ग तक सीमित न रखकर बच्चों, विद्यार्थियों, युवाओं, महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों, किसानों, व्यापारियों, श्रमिकों, जनप्रतिनिधियों एवं आम नागरिकों तक पहुंचाया गया। अभियान का मुख्य उद्देश्य साइबर अपराध घटित होने के बाद की कार्रवाई के साथ-साथ अपराध होने से पहले ही नागरिकों को सतर्क और सुरक्षित बनाना रहा। पुलिस टीमों ने प्रत्यक्ष संवाद, जनचौपाल, शैक्षणिक संस्थानों, बैंकिंग व वित्तीय संस्थानों, ग्राम पंचायतों तथा सार्वजनिक स्थलों पर जाकर आम जनता को जरूरी डिजिटल सावधानियों से अवगत कराया।
सप्ताह वार कार्यक्रम इस प्रकार रहे
*प्रथम सप्ताह – डिजिटल सुरक्षा की बुनियाद-* स्कूल एवं कॉलेजों में 20 कार्यक्रम आयोजित कर 1,420 विद्यार्थियों एवं नागरिकों को अनजान लिंक, संदिग्ध ऐप, कमजोर पासवर्ड, ओटीपी व पासवर्ड की गोपनीयता तथा सुरक्षित सोशल मीडिया उपयोग के संबंध में जागरूक किया गया।
द्वितीय सप्ताह- ऑनलाइन बैंकिंग एवं वित्तीय ठगी से बचाव-
बैंकिंग और वित्तीय संस्थानों में 6 कार्यक्रमों के माध्यम से 2,138 लोगों को यूपीआई फ्रॉड, फर्जी बैंक अधिकारी, क्यूआर कोड स्कैनिंग, ओटीपी तथा वित्तीय जानकारी साझा करने के खतरों से आगाह किया गया।
तृतीय सप्ताह- डिजिटल अरेस्ट के खिलाफ जागरूकता-
‘डिजिटल अरेस्ट’ एवं फर्जी कॉल्स जैसे नए व गंभीर साइबर अपराधों को लेकर विशेष जागरूकता सत्र आयोजित किए गए। इस दौरान 91 कार्यक्रमों में 23,027 नागरिकों को फर्जी पुलिस, सीबीआई अथवा ईडी अधिकारी बनकर की जाने वाली ठगी, वीडियो कॉल व फर्जी अरेस्ट वारंट/नोटिस से सावधान रहने की जानकारी दी गई।
चतुर्थ सप्ताह- मोबाइल एवं सोशल मीडिया सुरक्षा–
स्मार्टफोन प्राइवेसी, फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल, साइबर बुलिंग/ट्रोलिंग तथा निजी तस्वीरों व व्यक्तिगत डेटा के दुरुपयोग से बचाव हेतु 6,985 कार्यक्रम आयोजित कर 3,24,240 लोगों को जागरूक किया गया।
पंचम सप्ताह – युवाओं को जॉब फ्रॉड से बचाने पर जोर
– युवा वर्ग को फर्जी वर्क-फ्रॉम-होम, फर्जी भर्ती विज्ञापनों एवं फिशिंग लिंक से होने वाली ठगी से बचाने हेतु 4,612 कार्यक्रमों के जरिए 2,36,455 लोगों को जागरूक किया गया। पुलिस द्वारा किसी भी नौकरी के लिए अग्रिम राशि जमा न करने और कंपनी का सत्यापन करने की सलाह दी गई।
छठवां सप्ताह – व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा-
व्यक्तिगत फोटो, संवेदनशील दस्तावेज, लोकेशन आदि की सुरक्षा को लेकर 8,033 कार्यक्रम आयोजित कर 4,02,825 नागरिकों को जागरूक किया गया। इस दौरान गांव-गांव चौपाल लगाकर साइबर सुरक्षा की शपथ भी दिलाई गई।
सातवां सप्ताह – साइबर मुक्त छत्तीसगढ़ का संकल्प-
गांधी जयंती पर ग्राम पंचायतों एवं नगरीय निकायों में साइबर मुक्त छत्तीसगढ़ के संकल्प को जन-जन तक पहुंचाया गया। अंतिम सप्ताह में रिकॉर्ड 16,830 कार्यक्रमों के माध्यम से 8,41,908 लोगों को साइबर अपराध के प्रति सतर्क रहने तथा समाज को जागरूक करने का संकल्प दिलाया गया।
कुल 7 सप्ताह के इस अभियान में 36,577 जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर 18,32,013 नागरिकों तक साइबर सुरक्षा का संदेश पहुंचाया गया।
जागरूकता ही साइबर सुरक्षा का सबसे बड़ा हथियार: एसएसपी
एसएसपी भोजराम पटेल ने मुंगेली जिले द्वारा प्रदेश में 5वां स्थान प्राप्त करने पर पूरी पुलिस टीम एवं जिले वासियों की सहभागिता की सराहना की। उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीक के इस युग में थोड़ी-सी सावधानी बड़ी आर्थिक और मानसिक क्षति से बचा सकती है। अभियान की समाप्ति के बाद भी यह सतर्कता निरंतर बनी रहनी चाहिए। सभी नागरिक स्वयं सतर्क रहें, परिवार को सुरक्षित रखें और किसी भी संदेहास्पद कॉल, लिंक या प्रलोभन पर बिना पुष्टि के विश्वास न करें। साइबर अपराध की स्थिति में तत्काल 1930 पर संपर्क करें।






