मुंबई।आईआईटी बॉम्बे (IIT Bombay) की सीनेट ने परीक्षाओं में नकल और अनुचित साधनों के मामलों से निपटने के लिए नियमों का एक नया ड्राफ्ट तैयार किया है।इस नई व्यवस्था के तहत परीक्षा के दौरान अगर कोई छात्र संदिग्ध पाया जाता है या नकल करते हुए पकड़ा भी जाता है, तो उसे तुरंत डांटकर परीक्षा हॉल से बाहर नहीं निकाला जाएगा। निरीक्षक (Invigilator) छात्र के पास मौजूद फोन, चिट या अनधिकृत सामग्री को अपने पास जब्त कर लेंगे और घटना को निर्धारित फॉर्म में रिकॉर्ड कर लेंगे। इसके तुरंत बाद छात्र को एक नई उत्तर पुस्तिका (Fresh Answer Booklet) दे दी जाएगी ताकि वह बिना किसी मानसिक दबाव के अपनी शेष परीक्षा पूरी कर सके। छात्र को भी एक अलग फॉर्म पर घटना को लेकर अपना लिखित पक्ष दर्ज कराने का विकल्प मिलेगा।
संस्थान ने परीक्षा के बाद छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षा को प्राथमिकता देने के लिए नियमों को बेहद संवेदनशील बनाया है। परीक्षा खत्म होते ही काउंसलर्स की क्विक रिस्पांस टीम (QRT) को तुरंत अलर्ट कर दिया जाएगा ताकि संदिग्ध पाए गए छात्र को अकेला न छोड़ा जाए और उसे तत्काल मानसिक सहायता व मेंटर सपोर्ट मिल सके। इसके अलावा, परीक्षा समाप्त होने के करीब एक हफ्ते बाद इस मामले को विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई समिति (DDAC) के पास भेजा जाएगा। यहाँ भी किसी भी प्रकार की सजा या अनुशासनात्मक कार्रवाई से पहले छात्र को समिति के सामने अपनी बात रखने और स्पष्टीकरण देने का पूरा और निष्पक्ष अवसर दिया जाएगा।
यह ऐतिहासिक और छात्र-अनुकूल बदलाव हाल ही में 18 सितंबर को बीटेक सेकेंड ईयर के 22 वर्षीय छात्र साहिल वाकोड़े की दुखद आत्महत्या के बाद उठाया गया है। साहिल को मिड-सेमेस्टर परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन और चैटजीपीटी का उपयोग करते हुए पकड़ा गया था, जिसके कुछ ही घंटों बाद तनाव के कारण उन्होंने यह आत्मघाती कदम उठा लिया था। इस घटना के बाद कैंपस में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए और छात्रों ने परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए 18 सूत्री मांग पत्र सौंपा था। इसके बाद डायरेक्टर शिरीष केदारे ने चार संकाय सदस्यों (Faculty) और चार छात्रों को मिलाकर एक 8-सदस्यीय विशेष समिति का गठन किया, जिसकी अंतरिम सिफारिशों के आधार पर सीनेट ने कड़े नियमों को फिलहाल रोक दिया है और अधिक उदार 2015 के नियमों को वापस लागू करने पर सहमति जताई है।






