स्वामी आत्मानंद स्कूल दाऊपारा में विधिक जागरूकता कार्यक्रम, सिविल जज ने बच्चों को POCSO कानून की दी जानकारी

संदीप यादव मुंगेली। स्वामी आत्मानंद नन्द स्कूल दाऊपारा मुंगेली में छात्र-छात्राओं के लिए विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कु. श्रेया तुलावी और कु. अतुनावी प्रसाद, सिविल जज प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट मुंगेली द्वारा स्कूली बच्चों को कानून की विस्तृत जानकारी दी गई। इस दौरान शाला प्राचार्य श्रीमती लीला श्रीवास्तव, विजय यादव, विकास जैन, हरीश कुमार सेवा, विजेन्द्र देवांगन सहित शिक्षकगण उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में जज द्वय ने लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 (POCSO Act 2012) के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि यह अधिनियम बच्चों को यौन शोषण, यौन उत्पीड़न और अश्लील सामग्री जैसे जघन्य अपराधों से बचाने के लिए बनाया गया विशेष कानून है। यह कानून 14 नवंबर 2012 से पूरे देश में प्रभावी हुआ था।

अधिनियम की मुख्य विशेषताएं और प्रावधान

*बालक की परिभाषा: इस कानून के तहत 18 वर्ष से कम उम्र के प्रत्येक व्यक्ति को बालक माना गया है, चाहे उसका लिंग कोई भी हो। यह कानून लिंग तटस्थ है।

मुख्य अपराध और दंड का प्रावधान:

– *प्रवेशन लैंगिक हमला (धारा 3 व 4):* इसमें कम से कम 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास और जुर्माने का प्रावधान है।

– *गुरुतर प्रवेशन लैंगिक हमला (धारा 5 व 6):* पुलिस, सुरक्षा बल, परिवार या अधिकार प्राप्त पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा यह कृत्य करने पर 20 साल से लेकर आजीवन कारावास या मृत्युदंड तक की सजा हो सकती है।

– *लैंगिक हमला (धारा 7 व 8):* इसमें 3 से 5 साल तक की सजा का प्रावधान है।

– *लैंगिक उत्पीड़न (धारा 11 व 12):* इसमें भी सजा का प्रावधान रखा गया है।

– *अश्लील प्रयोजनों के लिए बच्चे का उपयोग (धारा 13 से 15):* बच्चों से जुड़ी अश्लील सामग्री (Pornography) के भंडारण या उपयोग करने पर भी कठोर सजा मिलती है।

*बाल-अनुकूल प्रक्रिया:* बच्चों के बयान दर्ज करते समय पुलिस वर्दी में नहीं रहती और बच्चे की पसंद की जगह या उसके घर पर बयान लिए जा सकते हैं। बच्चे की पहचान को पूरी तरह गोपनीय रखा जाता है। मीडिया या किसी भी व्यक्ति द्वारा बच्चे का नाम या पहचान उजागर करना कानूनी अपराध माना गया है।

*अनिवार्य रिपोर्टिंग (धारा 19):* यदि किसी व्यक्ति को बच्चे के साथ यौन उत्पीड़न की जानकारी मिलती है और वह पुलिस को सूचना नहीं देता, तो उसे 6 महीने तक की सजा या जुर्माना हो सकता है।

विशेष न्यायालय: मामलों की शीघ्र सुनवाई के लिए हर जिले में विशेष POCSO कोर्ट का गठन किया गया है। इस कानून से जुड़े आधिकारिक दस्तावेज और अधिक जानकारी महिला एवं बाल विकास मंत्रालय या NCPCR की वेबसाइट पर देखी जा सकती है।

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