जर्जर स्कूल भवन ने बढ़ाई बच्चों की परेशानी, खुले आसमान के नीचे पढ़ने को मजबूर नौनिहाल

जियाउल खान ,लखनपुर सरगुजा


  • भवन के अभाव में दो पालियों में स्कूल का संचालन

  • छत का प्लास्टर गिरने से बाल-बाल बचे बच्चे

  •  स्कूल जतन योजना के तहत मरम्मत पर भी उठे सवाल

  •  15 दिनों में नए भवन के हैंडओवर का शिक्षकों ने किया दावा

सरगुजा जिले के आकांक्षी विकासखंड लखनपुर के ग्राम तुरगा में शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला भवन की जर्जर हालत ने शिक्षा व्यवस्था की बदहाली उजागर कर दी है। स्कूल भवन की छत और प्लास्टर की स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि छत का प्लास्टर गिरने से स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे बाल-बाल बच गए। बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए शिक्षकों ने स्कूल के सामने मैदान में खुले आसमान के नीचे कक्षाएं संचालित करना शुरू कर दिया है।

बताया जा रहा है कि भवन की जर्जर स्थिति के कारण कक्षा पहली से आठवीं तक के बच्चों को पेड़ के नीचे और मैदान में बैठाकर पढ़ाई कराई जा रही है। स्कूल भवन की अनुपलब्धता के चलते बच्चों के साथ शिक्षकों को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सबसे बड़ी समस्या उस समय खड़ी हो जाती है, जब अचानक मौसम खराब हो जाता है। बारिश और तेज धूप के बीच बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है। वहीं, मजबूरी में कभी-कभी बच्चों को जर्जर भवन में बैठकर पढ़ाई करने की स्थिति भी बन जाती है।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि लगभग दो-तीन वर्ष पूर्व स्कूल जतन योजना के तहत भवन की छत की मरम्मत कराई गई थी, लेकिन मरम्मत के नाम पर केवल खानापूर्ति की गई। यही वजह है कि कुछ समय बाद ही भवन फिर से जर्जर हालत में पहुंच गया और अब बच्चों को खुले आसमान के नीचे पढ़ाई करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

ग्रामीणों के अनुसार, पहले शासकीय प्राथमिक शाला भवन जर्जर होने के कारण प्राथमिक शाला का संचालन भी शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला भवन के दो फलियों में किया जा रहा था। अब पूर्व माध्यमिक शाला भवन भी जर्जर हो चुका है। ऐसे में प्राथमिक और माध्यमिक दोनों विद्यालयों का संचालन खुले मैदान में पेड़ के नीचे दो पालियों में किया जा रहा है। इससे बच्चों की पढ़ाई के साथ उनकी सुरक्षा भी चिंता का विषय बन गई है।

दो पालीयों में स्कूल का संचालन 

तुरगा में शासकीय प्राथमिक शाला का भवन जर्जर होने तथा भवन के डिस्मेंटल करने के बाद शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला भवन में स्कूल का संचालन 3 साल से हो रहा सुबह 7:00 बजे से 12:00 बजे तक किया जा रहा था।वही दूसरी पाली में दोपहर 12:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक छठवीं से आठवीं तक के स्कूल का संचालन हो रहा था। ग्रामीणों के द्वारा बताया गया कि शासकीय प्राथमिक शाला भवन को डिस्मेंटल करते हुए नए भवन का निर्माण कराया जा रहा है। शासकीय प्राथमिक शाला का अतिक्त भवन लगभग बनकर तैयार हो चुका है।इसी दौरान शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला का भवन भी जर्जर हो चुका है बरसात के दिनों में कई जगह सीपेज होने तथा छत का प्लास्टर उखाड़ना शुरू हो गया है। जिस कारण शिक्षकों के द्वारा स्कूल के बाहर खुले आसमान और महुआ पेड़ के नीचे स्कूल का संचालन किया जा रहा है।

15 दिनों में नए भवन के हैंडओवर का दावा

वहीं, स्कूल के शिक्षकों का कहना है कि नया भवन बनकर तैयार हो रहा है और आगामी 15 दिनों के भीतर भवन स्कूल प्रबंधन को हैंडओवर कर दिया जाएगा। इसके बाद बच्चों को नए भवन में बैठकर पढ़ाई करने की सुविधा मिल सकेगी।

आखिर बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी?

ऐसे में सवाल उठता है कि जब स्कूल भवन की स्थिति पहले से ही जर्जर थी, तो समय रहते वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई? स्कूल जतन योजना के तहत कराई गई मरम्मत की गुणवत्ता की जांच आखिर क्यों नहीं हुई? क्या जिम्मेदार अधिकारियों ने कभी भवन की वास्तविक स्थिति का निरीक्षण किया? शिक्षा के मंदिर में जहां बच्चों का भविष्य संवरना चाहिए, वहां नौनिहालों को खुले आसमान के नीचे बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है। अब ग्रामीणों और अभिभावकों को नए भवन के जल्द हैंडओवर होने के साथ-साथ पुराने भवन की मरम्मत और लापरवाही की जांच का इंतजार है।

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