केरल की नन्ही हथिनी ‘माया’ को मिला नया जीवन, विशेष विमान से इलाज के लिए लाया गया जामनगर वंतारा

केरल के जंगलों में महज़ अठारह महीने की एक नन्ही हथिनी मिली थी, जो अकेली, असहाय और अपनी माँ के स्नेह से कोसों दूर थी। इस नन्ही जान का नाम माया है। जिस उम्र में एक हाथी का बच्चा अपनी माँ के साये में दुनिया को पहचानना सीखता है, खेलता है और लड़खड़ाते कदमों से उसके पीछे चलता है, उसी उम्र में माया को जीवन की ऐसी पीड़ा से गुजरना पड़ा जिसकी कल्पना भी मन को भीतर तक झकझोर देती है। उसके आगे के पैरों में कई जगह गंभीर फ्रैक्चर हैं, जिससे वह असहनीय दर्द से जूझ रही है। लेकिन माया की यह दर्दभरी कहानी यहीं खत्म नहीं हुई, बल्कि इसमें उम्मीद का एक नया अध्याय जुड़ गया है।

इच्छामृत्यु की कगार से वंतारा तक का सफर

माया जन्म के पहले ही दिन नदी पार करते समय अपने झुंड से बिछड़ गई थी, जिसके बाद केरल वन विभाग ने उसे बचाकर बड़े लाड-प्यार से पाला। हालांकि, जुलाई 2026 में खेलते समय अचानक गिरने से उसके दाहिने कंधे और पैरों में गंभीर फ्रैक्चर हो गए। लगातार इलाज के बाद भी जब उसकी हड्डियों की हालत नहीं सुधरी और वह खड़ी होने में पूरी तरह असमर्थ हो गई, तो डॉक्टरों के एक मेडिकल बोर्ड ने भारी मन से उसे दर्द से मुक्ति देने के लिए दया-मृत्यु (इच्छामृत्यु) तक की सिफारिश कर दी थी। ऐसे नाजुक मोड़ पर अनंत अंबानी की पहल ने माया की जिंदगी बदल दी और ‘वंतारा’ की टीम ने उसे बचाने का जिम्मा उठाया।

चार्टर्ड विमान से एयरलिफ्ट और आधुनिक उपचार

माया की नाजुक स्थिति को देखते हुए उसे केरल से एक विशेष चार्टर्ड विमान (फ्लाइट) के जरिए सुरक्षित रूप से जामनगर स्थित वंतारा लाया गया है। यहाँ अंतरराष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञ पशु चिकित्सकों की एक बड़ी टीम चौबीसों घंटे उसकी निगरानी और सेवा में जुटी हुई है। वंतारा के अत्याधुनिक अस्पताल में माया के पैरों को ठीक करने के लिए आधुनिक जाँच, हार्मोनल थेरेपी और विशेष हाइड्रोथेरेपी जैसी उन्नत तकनीकों का सहारा लिया जा रहा है, ताकि उसे बिना किसी दर्द के दोबारा अपने पैरों पर खड़ा किया जा सके।

परिचित देखभालकर्ताओं का अटूट साथ

माया को इस नए माहौल में अजनबीपन का अहसास न हो और उसे मानसिक रूप से बल मिले, इसके लिए केरल से उसके साथ आए पुराने देखभालकर्ता भी जामनगर में ही रुके हुए हैं। वे चौबीसों घंटे माया के साथ रहते हैं, जिससे उसे अपनेपन का हौसला मिल रहा है। डॉक्टरों के अनुसार माया के पूर्ण पुनर्वास और रिकवरी में लगभग 4 से 6 महीने का लंबा समय लग सकता है, और इस दौरान उसकी हर छोटी-बड़ी जरूरत का ख्याल रखा जा रहा है। पूरी दुनिया इस नन्ही जान के जल्द से जल्द स्वस्थ होकर दौड़ने की कामना कर रही है।

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