बलौदाबाजार: (रिपोर्टर मोहन तिवारी)छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार वन मंडल के अंतर्गत बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य में दो अलग-अलग घटनाओं में तीन चित्तीदार हिरणों (चीतल) की मौत हो गई. 7 जुलाई को बरनवापारा वन रेंज की पकरीद बीट के अंतर्गत रामपुर घास के मैदान में नियमित गश्त के दौरान दो नर चीतल मृत पाए गए, जबकि अगले दिन उसी इलाके में एक और चीतल का शव मिला.
वन विभाग ने दी जानकारी
मंडलीय वन अधिकारी (DFO) धम्मशील गनवीर ने बताया कि कासडोल स्थित सरकारी पशु चिकित्सालय में पशु चिकित्सकों द्वारा दोनों नर हिरणों का पोस्टमार्टम किया गया. उन्होंने कहा कि शुरुआती जांच में दोनों जानवरों की गर्दन पर चोट के निशान मिले हैं, जिससे संकेत मिलता है कि उनकी मौत आपस में लड़ाई के दौरान हुई हो सकती है.
पोस्टमार्टम के दौरान उनके शरीर के अन्य हिस्सों पर किसी मांसाहारी जंगली जानवर के हमले के कोई निशान नहीं मिले. हालांकि उनकी गर्दन के आसपास खून के धब्बे देखे गए, लेकिन मौत का सही कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद ही पता चलेगा. प्रथम दृष्टया, यह एक स्वाभाविक घटना लगती है. 8 जुलाई को गश्त के दौरान उसी घास के मैदान में एक और चीतल मृत पाया गया. शव की जांच करने पर उसकी गर्दन पर किसी जंगली शिकारी के हमले के कारण चोट के स्पष्ट निशान पाए गए. मौके पर सींग और खाल सहित शरीर के सभी अंग सुरक्षित पाए गए, जिससे अवैध शिकार की संभावना खारिज हो गई- धम्मशील गनवीर, डीएफओ
डीएफओ धम्मशील गणवीर ने कहा कि वन्यजीवों की आवाजाही पर नज़र रखने के लिए 8 जुलाई की शाम को इलाके में एक ट्रैप कैमरा लगाया गया था. उन्होंने कहा कि वन विभाग जानवरों के प्राकृतिक आवास में कोई दखल दिए बिना उन पर कड़ी नज़र रख रहा है. उन्होंने कहा कि वन अधिकारी और कर्मचारी वन्यजीवों की सुरक्षा और संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए अभयारण्य में नियमित गश्त करते हैं।






