डोंगरगांव में न्याय की जीत: एसडीएम का बड़ा फैसला, सूदखोरों द्वारा हड़पी गई किसानों की जमीन की रजिस्ट्री 15 साल बाद शून्य घोषित

राजनांदगांव (छत्तीसगढ़)। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के डोंगरगांव क्षेत्र से न्याय की एक ऐसी ऐतिहासिक कहानी सामने आई है, जिसने न्याय व्यवस्था पर आम जनता और गरीब किसानों के भरोसे को और मजबूत कर दिया है। प्रशासन ने क्षेत्र के गरीब और सीधे-साधे किसानों के हक में एक बहुत बड़ा और साहसिक फैसला सुनाया है। डोंगरगांव के अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) अनिकेत साहू ने सालों से सरकारी दफ्तरों और अदालतों के चक्कर काट रहे पीड़ित किसानों को राहत देते हुए, सूदखोरों द्वारा फर्जी तरीके से अपने नाम कराई गई जमीनों की रजिस्ट्री को तत्काल प्रभाव से शून्य यानी रद्द करने का कड़ा आदेश जारी किया है। इस फैसले के बाद प्रभावित किसान परिवारों की खुशी का ठिकाना नहीं है, क्योंकि उन्हें करीब डेढ़ दशक (15 साल) के लंबे और थका देने वाले कानूनी संघर्ष के बाद आखिरकार अपनी पैतृक जमीन वापस मिल पाई है।कर्ज चुकाने के बाद भी हुआ धोखाइस पूरे संवेदनशील मामले की शुरुआत लगभग 17-18 साल पहले हुई थी। मिली जानकारी के अनुसार, वर्ष 2008-09 में डोंगरगांव क्षेत्र के लगभग दर्जन भर ग्रामीण किसानों को अपनी खेती-किसानी और पारिवारिक जरूरतों के लिए पैसों की सख्त जरूरत थी। बैंक की जटिल प्रक्रियाओं से बचने के लिए इन सीधे-साधे किसानों ने स्थानीय रसूखदार सूदखोरों से ब्याज पर मोटी रकम उधार ली थी। इसके बाद, किसानों ने पाई-पाई जोड़कर ब्याज सहित पूरी रकम की अदायगी भी समय पर कर दी। लेकिन सूदखोरों की नीयत में खोट आ चुका था। पैसों की पूरी वापसी होने के बावजूद, सूदखोरों ने किसानों की अज्ञानता और लाचारी का फायदा उठाया। उन्होंने सुनियोजित साजिश रचते हुए वर्ष 2011 में धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेजों का सहारा लेकर इन बेकसूर किसानों की कीमती जमीनों की रजिस्ट्री चुपके से अपने नाम करवा ली।15 साल का लंबा और दर्दनाक संघर्षजब पीड़ित किसानों को इस बात की भनक लगी कि उनकी जमीनें अब उनकी नहीं रहीं और सूदखोरों ने उन्हें पूरी तरह से हड़प लिया है, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। सूदखोरों की इस घिनौनी धोखाधड़ी के खिलाफ किसानों ने तुरंत कानून और न्यायालय की शरण ली। यह अदालती और प्रशासनिक लड़ाई इतनी लंबी, थकाऊ और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने वाली थी कि इसकी कीमत कुछ बुजुर्ग किसानों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। न्यायालय की तारीखों पर पेशी जाते-जाते और न्याय की आस लगाए बैठे-बैठे कुछ मूल किसान पिताओं का दुखद स्वर्गवास हो गया। उन्होंने अपनी आंखों के सामने अपनी जमीन वापस मिलने का सपना देखा था जो उनके जीवनकाल में पूरा नहीं हो सका।बेटों ने जारी रखी पिताओं की अधूरी लड़ाईबुजुर्ग पिताओं के देहांत के बाद भी सूदखोरों के हौसले पस्त नहीं हुए, लेकिन पीड़ित परिवारों के बेटों ने भी हिम्मत नहीं हारी। अपने पिताओं के निधन के बाद उनके पुत्रों ने इस न्याय की अधूरी लड़ाई की कमान अपने हाथों में ली। उन्होंने अदालती तारीखों, पैसों की तंगी और सूदखोरों के हर दबाव का डटकर सामना किया। आखिरकार, उनके इस अटूट धैर्य और निरंतर संघर्ष का सकारात्मक परिणाम आज डोंगरगांव एसडीएम अनिकेत साहू के इस बड़े फैसले के रूप में सबके सामने आया है। प्रशासन के इस कड़े कदम ने क्षेत्र के अन्य सूदखोरों और भू-माफियाओं को भी एक कड़ा संदेश दिया है कि गरीबों का शोषण करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।

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