सावन सोमवार विशेष : जानिए ब्रह्मांड के अधिपति भगवान शिव के कुल कितने स्वरूप और अवतार हैं?

सावन का पवित्र महीना चल रहा है और पूरे छत्तीसगढ़ सहित देश भर के शिवालयों में ‘हर-हर महादेव’ की गूंज है. शिव भक्त लगातार महादेव की भक्ति में डूबे हुए हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि सृष्टि के संहारक और भक्तों के भोलेनाथ के कुल कितने स्वरूप या अवतार हैं?

अक्सर लोग इस बात को लेकर असमंजस में रहते हैं. सनातन शास्त्रों और पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, शिव अनंत हैं, लेकिन उनके मुख्य अवतारों और रूपों की संख्या निश्चित की गई है.

आइए जानते हैं शिव महापुराण के अनुसार महादेव के कुल रूपों का पूरा गणित.

1. शिव महापुराण के अनुसार: मुख्य 19 अवतारधार्मिक ग्रंथों और शिव महापुराण के शतरुद्र संहिता के अनुसार, संसार के कल्याण और विभिन्न लीलाओं के लिए भगवान शिव ने मुख्य रूप से 19 अवतार लिए थे.

इन अवतारों की सूची इस प्रकार है:

  • वीरभद्र अवतार: सती के आत्मदाह के बाद शिव के क्रोध से उत्पन्न पहला उग्र रूप.पिप्पलाद अवतार: शनिदेव के प्रकोप से मानव जाति को बचाने वाला रूप.
  • नंदी अवतार: शिलाद ऋषि के पुत्र के रूप में जन्मा शिव का रूप.
  • भैरव अवतार: ब्रह्मा जी का अहंकार तोड़ने के लिए प्रकट हुआ रूप (काशी के कोतवाल).हनुमान जी: महादेव का सबसे शक्तिशाली और प्रसिद्ध रुद्रावतार.
  • शरभ अवतार: भगवान नरसिंह के क्रोध को शांत करने के लिए लिया गया पक्षी-पशु मिश्रित रूप.
  • अश्वत्थामा: गुरु द्रोणाचार्य के पुत्र के रूप में जन्मा शिव का अंश अवतार.
  • ऋषि दुर्वासा: अनसूया और अत्रि के पुत्र, जो अपने तीव्र क्रोध के लिए जाने जाते हैं.

इसके अलावा गृहपति, यतिनाथ, कृष्णदर्शन, अवधूत, भिक्षुवर्य, सुरेश्वर, किरात, सुनटनर्तक, ब्रह्मचारी, यक्षेश्वर और वृषभ अवतार शामिल हैं.

2. 11 रुद्रावतार (एकादश रुद्र)देवताओं की रक्षा और असुरों के नाश के लिए कश्यप ऋषि और सुरभि के माध्यम से भगवान शिव ने 11 रुद्र रूप धारण किए थे.

इन्हें एकादश रुद्र कहा जाता है:कपाली, पिंगल, भीम, विरूपक्ष, विलोहित, शास्ता, अजपाद, अहिरबुध्न्य, शम्भु, चण्ड और भव.

3. महादेव के 5 मुख्य मुख (पंचमुखी स्वरूप)शिवलिंग या मूर्तियों में शिव के 5 दिव्य मुख दिखाए जाते हैं, जो सृष्टि की पांच दिशाओं और तत्वों का संचालन करते हैं:

  • सद्योजात: पश्चिम दिशा (पृथ्वी तत्व)
  • वामदेव: उत्तर दिशा (जल तत्व)
  • अघोर: दक्षिण दिशा (अग्नि तत्व)तत्पुरुष:
  • पूर्व दिशा (वायु तत्व)
  • ईशान: ऊर्ध्व दिशा/आकाश (आकाश तत्व)

4. अन्य पौराणिक गणनाएं (28 और 64 रूप)कूर्म पुराण के अनुसार: भगवान शिव के 28 अवतारों का वर्णन मिलता है, जिनमें श्वेत मुनि से लेकर योगात्मा तक शामिल हैं.

तंत्र शास्त्र और मूर्तिकला के अनुसार: शिव के 64 स्वरूप (64 Manifestations) माने गए हैं, जिनमें नटराज, अर्धनारीश्वर, दक्षिणमूर्ति और कल्याणसुंदर जैसे प्रसिद्ध रूप आते हैं.

12 ज्योतिर्लिंग: देश के अलग-अलग कोनों में स्थित 12 ज्योतिर्लिंगों को भी शिव महापुराण में महादेव का साक्षात विग्रह और अवतार ही माना गया है.

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