ब्रजेश पाण्डे,दंतेवाड़ा: बस्तर क्षेत्र में लोक परंपरा और आस्था का अनूठा संगम देखने को मिला। क्षेत्र में पहुंचे अतिथि का ग्रामीणों ने फूल-मालाओं, तिलक और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ भव्य स्वागत किया।

तस्वीरों में देखा जा सकता है कि ग्रामीण महिलाएं और पुरुष ढोल-नगाड़ों की धुन पर अतिथि को माला पहनाते हुए नजर आए। किसी ने तिलक लगाकर आशीर्वाद दिया तो किसी ने आरती उतारकर स्वागत किया। सुरक्षा कर्मी भी साथ में मौजूद रहे। 
आयोजन के दौरान पारंपरिक वेशभूषा में सजे अतिथि ने भी ग्रामीणों का अभिवादन स्वीकार किया। शाम को मंदिर परिसर को रंग-बिरंगी लाइटों और फूलों से सजाया गया। भव्य चांदलियर, लाइटिंग और सजावट से पूरा माहौल भक्तिमय हो गया। मंच पर स्थानीय जनप्रतिनिधि और गणमान्य लोग भी मौजूद रहे।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए और मोबाइल से तस्वीरें व वीडियो बनाकर इस पल को कैद किया। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे आयोजन से क्षेत्र की संस्कृति को बढ़ावा मिलता है और लोगों में आपसी सौहार्द बढ़ता है।
बस्तर की संस्कृति, बस्तर की परंपरा – यही हमारी पहचान है।






