सेवा संकल्प अभियान के तहत दंतेवाड़ा में “आंगन मिलन कार्यक्रम” का आयोजन, महिलाओं और बच्चों को मिली शासकीय योजनाओं की जानकारी

*ब्रजेश पाण्डे*  *AG ख़बर दंतेवाड़ा*


*दंतेवाड़ा* – जिले में शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं को घर-घर तक पहुंचाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे *”सेवा संकल्प अभियान”* के तहत जिले के विभिन्न ब्लॉकों में *”आंगन मिलन कार्यक्रम”* का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य महिलाओं, बच्चों और परिवारों से सीधे संवाद कर उन्हें स्वास्थ्य, पोषण और स्वच्छता के प्रति जागरूक करना है।

*क्या रहा कार्यक्रम में खास*

आंगनबाड़ी केंद्रों और स्कूल परिसरों में आयोजित इस मिलन समारोह में रंगोली, स्थानीय खान-पान की प्रदर्शनी और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ ग्रामीणों का स्वागत किया गया।

तस्वीरों में देखा जा सकता है कि आंगनबाड़ी में बच्चों और महिलाओं की गोदभराई, पोषण आहार और मोटे अनाजों से बनी रंगोली “आंगन का मिलन उत्सव” बनाई गई। साथ ही हरी सब्जियां, दालें, फल और पोषक तत्वों से भरपूर स्थानीय खाद्य सामग्री को थाली में सजाकर “पोषण थाली” का संदेश भी दिया गया।

कार्यक्रम के दौरान उत्कृष्ट कार्य करने वाली माताओं और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को *प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित* भी किया गया। एक जगह ब्लैक बोर्ड पर *”पोषण माह – आंगन मिलन – नहाड़ी – 06/10/26″* भी लिखा नजर आया।

*महिलाओं को दी गई ये जानकारी*

कार्यक्रम में अधिकारियों और स्वास्थ्य कर्मियों ने उपस्थित महिलाओं और परिवारों को सरकार की विभिन्न योजनाओं के बारे में विस्तार से बताया:

1. *स्वास्थ्य और पोषण* – कुपोषण मुक्त भारत, एनीमिया मुक्ति अभियान और गर्भवती/धात्री महिलाओं की देखभाल

2. *स्वच्छता* – शौचालय उपयोग, हाथ धोने और साफ-सफाई के महत्व पर जोर

3. *शासकीय योजनाएं* – लाड़ली बहना, आयुष्मान कार्ड, पेंशन और राशन से जुड़ी योजनाओं की जानकारी

4. *बच्चों की शिक्षा* – आंगनबाड़ी में मिलने वाली सुविधाएं और बच्चों के टीकाकरण

*उद्देश्य: सीधा संवाद और जागरूकता*

सेवा संकल्प अभियान का मकसद सिर्फ योजना बताना नहीं, बल्कि हितग्राहियों से फीडबैक लेना और जमीनी समस्याओं को समझना भी है। “आंगन मिलन” के जरिए अधिकारी अब सीधे गांव की महिलाओं और बच्चों से मिलकर उनकी बात सुन रहे हैं।

इस पहल से ग्रामीण क्षेत्रों में शासन और जनता के बीच का फासला कम हो रहा है। महिलाएं भी अब खुलकर अपनी स्वास्थ्य और पोषण संबंधी समस्याओं को साझा कर रही हैं।

जिला प्रशासन का मानना है कि ऐसे कार्यक्रमों से ही “विकसित भारत” और “कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़” का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

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