केशगवां पंचायत में 18.63 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता का आरोप, जांच और राशि वसूली की मांग

कोरिया। ग्राम पंचायत केशगवां (सोनहत) के सरपंच एवं समस्त पंचों की ओर से कलेक्टर कोरिया को एक लिखित शिकायत प्रस्तुत कर पंचायत के पूर्व सचिव श्यामलाल सूर्यवंशी एवं पूर्व सरपंच मानमती सिंह के कार्यकाल में विभिन्न निर्माण एवं अन्य मदों के नाम पर कथित रूप से की गई वित्तीय अनियमितताओं की जांच कराने की मांग की गई है। शिकायत दिनांक 06 अक्टूबर 2026 को कलेक्टर कोरिया के समक्ष प्रस्तुत की गई है। शिकायत में कुल 18 लाख 63 हजार 541 रुपये की राशि के फर्जी आहरण तथा इसके बाद लगभग 7 लाख रुपये का भुगतान 15वें वित्त मद से किए जाने के लिए प्रभार में दिए जाने का उल्लेख किया गया है।

 

शिकायतकर्ताओं ने पूरे मामले की जांच कर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने तथा शासकीय राशि की वसूली कराने की मांग की है।

डीएससी के माध्यम से 3 लाख रुपये के फर्जी आहरण का आरोप

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पंचायत के पूर्व सचिव श्यामलाल सूर्यवंशी द्वारा सरपंच की डीएससी (डिजिटल सिग्नेचर) का उपयोग करते हुए एससीआई/एससी खाते से बिना सरपंच की सहमति के लगभग 3 लाख रुपये का फर्जी आहरण किया गया। शिकायत के अनुसार इस मामले की शिकायत सरपंच द्वारा कलेक्टर कोरिया से की गई थी, जिसमें फर्जी आहरण किए जाने की बात प्रमाणित होने का दावा किया गया है। इसके बाद पंचायत की राशि की बिना रिकवरी किए पुनः सचिव को बहाल किए जाने पर भी शिकायतकर्ताओं ने सवाल उठाए हैं।

निर्माण कार्यों के नाम पर राशि आहरण का आरोप

शिकायत में पिछले कार्यकाल के दौरान सचिव श्यामलाल एवं सरपंच मानमती सिंह द्वारा बिना कार्य कराए 15वें वित्त की राशि से कई निर्माण कार्यों के नाम पर भुगतान/आहरण किए जाने का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि कागजों में कार्य दर्शाए गए, जबकि मौके पर कई कार्य दिखाई नहीं देते हैं।

10 नग ढोढ़ी निर्माण के नाम पर 4.20 लाख रुपये का मामला

शिकायत के अनुसार ग्राम पंचायत केशगवां में 10 नग ढोढ़ी निर्माण के नाम पर लगभग 4 लाख 20 हजार रुपये का फर्जी बिल लगाकर राशि आहरित की गई। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि पंचायत में वास्तविक रूप से कोई नई ढोढ़ी का निर्माण नहीं कराया गया है। इसलिए इस मामले को जांच का विषय बताते हुए मौके पर भौतिक सत्यापन कराने की मांग की गई है।

छह चबूतरा निर्माण में भी अनियमितता का आरोप

इसी तरह ग्राम पंचायत में 6 नग चबूतरा निर्माण के नाम पर करीब 2 लाख 30 हजार रुपये का फर्जी बिल लगाकर राशि आहरण किए जाने का आरोप लगाया गया है। शिकायत में कहा गया है कि पंचायत में केवल एक चबूतरा बनाया गया है, जिसकी लागत लगभग 50 हजार रुपये बताई गई है। शिकायतकर्ताओं ने शेष राशि के आहरण की जांच कराने की मांग की है।

फर्नीचर के नाम पर 1.16 लाख रुपये आहरण

शिकायत में पंचायत भवन के लिए फर्नीचर के नाम पर 1 लाख 16 हजार रुपये का आहरण किए जाने का भी उल्लेख है। शिकायतकर्ताओं के अनुसार पंचायत भवन में पहले से ही एक टेबल और चार कुर्सियां उपलब्ध हैं। ऐसे में फर्नीचर के नाम पर आहरित राशि और वास्तविक सामग्री की जांच की मांग की गई है।

 

शेड निर्माण की स्वीकृति विधायक मद से, राशि पंचायत से निकालने का आरोप

ग्राम पंचायत में सामुदायिक भवन के सामने शेड निर्माण के नाम पर 1 लाख रुपये आहरण किए जाने का भी आरोप है। शिकायत में कहा गया है कि उक्त शेड निर्माण विधायक मद से स्वीकृत था, बावजूद इसके पंचायत की राशि से आहरण किया गया। इस बिंदु को भी शिकायतकर्ताओं ने जांच योग्य बताया है।

 

रैनिंग वाटर के नाम पर 5.76 लाख रुपये आहरण

शिकायत का एक महत्वपूर्ण बिंदु पंचायत के विभिन्न भवनों में रैनिंग वाटर व्यवस्था से संबंधित है। शिकायत के अनुसार रैनिंग वाटर के नाम पर 5 लाख 76 हजार 860 रुपये का आहरण किया गया है। इसके अलावा करीब 4 लाख 30 हजार रुपये का भुगतान करने के लिए प्रभार में दिए जाने का उल्लेख है।

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि रैनिंग वाटर व्यवस्था में इतनी बड़ी राशि खर्च नहीं हुई है। इसलिए पूरे कार्य का मूल्यांकन एवं भौतिक सत्यापन कर वास्तविक खर्च और आहरित राशि की जांच कराने की मांग की गई है, ताकि कथित फर्जीवाड़े का खुलासा हो सके और शासकीय राशि का सदुपयोग सुनिश्चित किया जा सके।

सड़क निर्माण के नाम पर भी फर्जी बिल का आरोप

ग्राम पंचायत में सड़क जिणोद्धार के नाम पर जामपारा चौराहा से शालिक राम के घर तक 49 हजार 541 रुपये तथा मुरूम के नाम पर 72 हजार रुपये का आहरण किए जाने का आरोप लगाया गया है। शिकायत में कहा गया है कि मौके पर उक्त कार्य नहीं कराया गया है। इस मामले में भी भौतिक सत्यापन कराकर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की गई है।

 

बैंक खाते की राशि को लेकर भी उठाए सवाल

शिकायत में पंचायत के 15वें वित्त के बैंक खाते में बचत राशि के संबंध में भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पूर्व सचिव श्यामलाल सूर्यवंशी द्वारा 2 लाख 56 हजार 948 रुपये की बचत राशि होने का प्रभार दिए जाने का उल्लेख है, जबकि बैंक पासबुक की एंट्री के अनुसार खाते में केवल 1 लाख 17 हजार रुपये ही शेष पाए जाने की बात कही गई है। शिकायतकर्ताओं ने इसे गंभीर वित्तीय अनियमितता बताते हुए जांच की मांग की है।

 

करीब 18.63 लाख रुपये के कथित फर्जी आहरण की जांच की मांग

शिकायत के अंतिम बिंदुओं में कहा गया है कि पूर्व सचिव श्यामलाल सूर्यवंशी एवं तत्कालीन सरपंच मानमती सिंह द्वारा 15वें वित्त की राशि का बड़ी मात्रा में कथित रूप से फर्जी आहरण कर गबन किया गया है। शिकायत के अनुसार लगभग 18 लाख 63 हजार 541 रुपये की राशि से संबंधित अनियमितताओं की जांच आवश्यक है।

 

साथ ही करीब 7 लाख रुपये के भुगतान के लिए प्रभार में दिए जाने का भी उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ताओं ने इसे गंभीर मामला बताते हुए पूरे प्रकरण की जांच कर दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई करने तथा दुरुपयोग की गई शासकीय राशि की वसूली कराने की मांग की है।

मौके पर जांच और दस्तावेजों के सत्यापन की मांग ग्राम पंचायत के सरपंच एवं पंचों ने कलेक्टर से मांग की है कि शिकायत में उल्लेखित सभी निर्माण कार्यों का मौके पर भौतिक सत्यापन, संबंधित बिल-वाउचर, बैंक स्टेटमेंट, पासबुक, स्वीकृति आदेश, भुगतान अभिलेख एवं निर्माण संबंधी दस्तावेजों की जांच कराई जाए। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति सामने आएगी और यदि वित्तीय अनियमितता प्रमाणित होती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए शासकीय राशि की वसूली की जानी चाहिए।

 

फिलहाल यह आरोप ग्राम पंचायत के सरपंच एवं पंचों द्वारा प्रस्तुत शिकायत में लगाए गए हैं। मामले में प्रशासनिक जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविकता और जिम्मेदारी स्पष्ट हो सकेगी।

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