- विभाग के जेई ने कहा मुआवजे के लिए आवेदन करो-ग्रामीणों में आक्रोश,
- पहली बारिश में विद्युत मेंटेनेंस की खुली पोल
- एक वर्ष में चौथी घटना, ग्रामीणों ने बताया लिखित शिकायत के बात भी विभाग मौन
डोंगरगांव (घनश्याम साव): क्षेत्र के ग्राम झींका(अर्जुनी) में ट्रांसफार्मर के स्टे वायर में करेंट की चपेट में आने से से गाय की मौत हो गई है. घटना 1 जुलाई सुबह की है, पहली बारिश के दौरान ग्राम के चौराहे में लगे खंबे के सपोर्टिंग तार की चपेट में एक गौवंश आ गई और उसकी तुरंत मौत हो गयी. इस ट्रांसफार्मर के सुधार कार्य के लिए कई बार शिकायतों और सुशासन तिहार में दिए आवेदन के बावजूद विद्युत विभाग के लापरवाह अधिकारी-कर्मचारी गंभीर नहीं हुए, जिसके चलते एक बार फिर ग्रामीण को नुकसान झेलना पड़ा है. बुधवार सुबह को हुई घटना में ग्राम के सार्वजनिक मंच के पास मुख्य ट्रांसफार्मर के पास रोहित यादव की दुधारू गाय करेंट की चपेट में आने से मौत हुई है. वहीं इसके पूर्व नारद साहू की गाय, भीखम ठाकुर की गाय, गोडरी निवासी फुलबासन यदु की भैंस की मौत करेंट की चपेट में आने से हो चुकी है.
जेेई ने कहा, मुआवजा के लिए आवेदन करो,
ग्रामीणों और मीडियाकर्मियों ने विद्युत विभाग अर्जुनी क्षेत्र के जेई शिवकुमार गायकवाड़ से गाय के करंट लगने से मौत के विषय में बताया तो उन्होंने अपना पल्ला झाड़ते हुए गाय को हटाने और मुआवजा के लिए आवेदन करने की बात करने लगे, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश और बढ़ गया. जिसके बाद ग्रामीणों ने इस घटना की सूचना थाने में दी और गौवंश का पोष्टमार्टम करवाया गया. इधर उच्च अधिकारियों को मामले की जानकारी होने पर तत्काल मौके पर कर्मचारियों को भेजा गया और घटना स्थल में नया ऊंचा पोल लगाकर फाल्ट को ठीक किया गया.
चार माह से किस बात का मेंटेनेंस ?
विद्युत विभाग व्दारा मेंटेनेंस के नाम पर बार-बार कटौती से गर्मी भर पूरे क्षेत्रवासी परेशान रहे और इसके बाद भी करेंट लगने से लेकर तरह-तरह की घटनाएँ सामने आना कई सवालों को जन्म देती है. इस घटना स्थल में वायर जर्जर होने, शार्ट सर्किट होने की विद्युत विभाग को कई आवेदन दिए जा चुके हैं, बावजूद इसके विभाग के लापरवाह अधिकारी इस पोल को व्यवस्थित नहीं कर पाये. मिली जानकारी के अनुसार इस ट्रांसफार्मर में फेस और न्यूटल के तारों को एक रबर के माध्यम से अलग किया गया था और यह फाल्ट विभाग के अधिकारियों की जानकारी में था जिसके सुधार के लिए प्रप्रोजल भी बनाकर भेजा गया था. बावजूद इसके अधिकारियों ने ग्रामीणों की जान जोखिम में डालने में कोई कसर नहीं छोड़ी. और जब दुर्घटना में गाय की मौत हुई और ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ा तब आनन-फानन में पोल लगाकर सुधार कार्य प्रारंभ किया गया.






