भाटापारा:(मोहन तिवारी)सड़क और गली मोहल्ले पर घूमती या बैठी गायों के कारण यातायात बाधित होना और दुर्घटनाएं होना एक गंभीर समस्या बन चुका है। इसके समाधान के लिए कई जगहों पर सामाजिक संस्थाएं गायों के गले में रेडियम बेल्ट बांध रही हैं ताकि रात में वे दूर से दिख सकें, वहीं प्रशासन और नागरिकों द्वारा सख्त ट्रैफिक नियमों व पशु मालिकों पर कार्रवाई की मांग की जा रही है।यातायात पर प्रभाव और समस्याएंसड़क जाम: हाईवे और मुख्य मार्गों पर अचानक गायों के झुंड के बैठने या खड़े होने से गाड़ियों की गति धीमी हो जाती है, जिससे भारी जाम लग जाता है।सड़क हादसे: रात के अंधेरे में या कोहरे के वक्त गाड़ी चालकों को मवेशी नजर नहीं आते, जिसके कारण गंभीर वाहन दुर्घटनाएं होती हैं और लोगों की जान चली जाती है।यादगार पहल: हादसों को रोकने के लिए कई स्थानों पर युवा और सामाजिक कार्यकर्ता गोवंश के गले में रेडियम रिफ्लेक्टर बेल्ट लगा रहे हैं, जिससे लाइट पड़ने पर वे चमकते हैं।जरूरी कदम और समाधानमालिकों पर जिम्मेदारी: जो लोग दूध निकालने के बाद अपने पशुओं को खुला छोड़ देते हैं, उन पशुपालकों पर भारी जुर्माना लगाया जाना चाहिए।प्रशासनिक कार्रवाई: नगर निगम और स्थानीय निकायों को आवारा पशुओं को पकड़कर सुरक्षित गौशालाओं में भेजना चाहिए।सतर्कता: वाहन चालकों को भी भीड़भाड़ वाले या खुले रास्तों पर नियंत्रित गति से गाड़ी चलानी चाहिए।






