बागेश्वर बाबा की भविष्यवाणी पर उठे सवाल, ‘पुत्र योग’ के पर्चे के बाद भक्त के घर जन्मी चौथी बेटी

झांसी/छतरपुर: मध्य प्रदेश के छतरपुर स्थित प्रसिद्ध तीर्थ स्थल बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री (बागेश्वर बाबा) एक बार फिर अपने दिव्य पर्चे और भविष्यवाणियों को लेकर विवादों के घेरे में आ गए हैं। इस बार उत्तर प्रदेश के झांसी से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने बाबा के दावों और उनके चमत्कारी पर्चों की सत्यता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक पीड़ित भक्त ने आरोप लगाया है कि धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने उन्हें बेटा होने का लिखित आशीर्वाद दिया था, लेकिन उनके घर में चौथी बेटी ने जन्म लिया है। इस घटना के बाद से सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है और अंधविश्वास के खिलाफ काम करने वाली संस्थाओं ने भी मोर्चा खोल दिया है।

क्या है पूरा मामला और भक्त का आरोप

यह पूरा घटनाक्रम झांसी के रहने वाले राजेंद्र कुमार नाम के एक व्यक्ति से जुड़ा है। राजेंद्र कुमार की पहले से ही तीन बेटियां थीं और वे पुत्र की कामना लेकर बागेश्वर धाम के दरबार में अर्जी लगाने पहुंचे थे। पीड़ित का दावा है कि दरबार के दौरान धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने उनकी समस्या को सुनते हुए एक विशेष पर्चा बनाया था, जिस पर स्पष्ट रूप से ‘पुत्र योग’ की बात लिखी गई थी। बाबा की इस भविष्यवाणी और दिव्य पर्चे पर अटूट भरोसा करते हुए राजेंद्र कुमार ने करीब दस साल के लंबे अंतराल के बाद चौथे बच्चे की योजना बनाई। हालांकि, जब उनके घर में चौथी बेटी ने जन्म लिया, तो उनका भरोसा पूरी तरह टूट गया। खुद को ठगा हुआ महसूस करते हुए राजेंद्र कुमार ने इस मामले को सार्वजनिक किया और बाबा के दावों को झूठा करार दिया।

अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति का हस्तक्षेप और एक करोड़ की चुनौती

इस घटना के सामने आने के बाद मामला और ज्यादा तूल पकड़ चुका है। पीड़ित पिता ने अपनी शिकायत लेकर नागपुर की प्रसिद्ध संस्था ‘अखिल भारतीय अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति’ (अंनिस) से संपर्क साधा। समिति ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। समिति के पदाधिकारियों ने इस घटना को अंधविश्वास को बढ़ावा देने वाला बताते हुए बागेश्वर बाबा को एक बार फिर खुली चुनौती दी है। संस्था का कहना है कि यदि धीरेंद्र शास्त्री अपनी इस चमत्कारी या दैवीय शक्ति को किसी भी वैज्ञानिक मंच या बंद कमरे में कसौटी पर सही साबित करके दिखा देते हैं, तो समिति उन्हें एक करोड़ रुपये का नकद पुरस्कार देगी। समिति के साथ हुई काउंसलिंग के बाद हालांकि पीड़ित पिता ने यह साफ किया कि वे अपनी चौथी बेटी से बेहद प्यार करते हैं और उसे अच्छी परवरिश देंगे, लेकिन वे समाज को यह दिखाना चाहते थे कि ऐसे दावों पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं करना चाहिए।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस और समर्थकों का तर्क

खबर के वायरल होते ही इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर दो विरोधी गुट आमने-सामने आ गए हैं। एक तरफ जहां तर्कवादी और बाबा के आलोचक इस घटना को अंधविश्वास का पर्दाफाश मान रहे हैं और बाबा के दावों पर कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बागेश्वर धाम के समर्थक धीरेंद्र शास्त्री के बचाव में उतर आए हैं।

समर्थकों का तर्क है कि सनातन धर्म में ‘योग’ होने का अर्थ यह नहीं होता कि वह घटना तुरंत या उसी रूप में घटित हो जाएगी। उनका कहना है कि बाबा ने केवल आशीर्वाद के रूप में ‘पुत्र योग’ लिखा था और इसे किसी भी प्रकार की पक्की भविष्यवाणी या मेडिकल गारंटी की तरह नहीं देखा जाना चाहिए।

फिलहाल इस पूरे विवाद पर बागेश्वर धाम या धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की ओर से कोई आधिकारिक या स्पष्टीकरण वाला बयान सामने नहीं आया है।

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