विश्व बाघ दिवस: शिवतराई में आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए डिप्टी सीएम

  • पर्यावरण संतुलन के लिए बाघ और वृक्ष दोनों का संरक्षण जरूरी: उपमुख्यमंत्री साव

  • बाघ संरक्षण से मजबूत हो रहा अचानकमार का पर्यावरणीय संतुलन: कलेक्टर

मुंगेली, संदीप यादव।विश्व बाघ दिवस के अवसर पर मंगलवार को अचानकमार क्षेत्र स्थित शिवतराई में जिला स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री *अरुण साव*, जिला पंचायत अध्यक्ष *श्रीकांत पांडेय*, कलेक्टर *कुन्दन कुमार*, फील्ड डायरेक्टर *प्रियंका पांडेय*, वनमंडलाधिकारी *अभिनव कुमार*, जिला पंचायत सदस्य *अंबालिका साहू* सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी, वनकर्मी, छात्र-छात्राएं एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती एवं छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। अतिथियों का पुष्पगुच्छ से स्वागत एवं स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मान किया गया। वन्यजीव संरक्षण, जंगल भ्रमण एवं सेवा कार्यों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले वनकर्मियों को प्रशस्ति-पत्र एवं सम्मान प्रदान किया गया।

*बाघ और वृक्ष दोनों का संरक्षण जरूरी*

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि भारत आज विश्व के सबसे बड़े बाघ आवास वाले देशों में शामिल है और देश के 58 टाइगर रिजर्व जैव विविधता की अमूल्य धरोहर हैं। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार शरीर का प्रत्येक अंग आवश्यक होता है, उसी प्रकार जंगलों के लिए बाघ अनिवार्य हैं। बाघ रहेंगे तो जंगल जीवंत रहेंगे, जंगल रहेंगे तो पर्यावरण संतुलित रहेगा और तभी जीवन सुरक्षित रहेगा।

उन्होंने प्रधानमंत्री *नरेंद्र मोदी* के _एक पेड़ मां के नाम_ अभियान का उल्लेख करते हुए अधिक से अधिक वृक्षारोपण एवं पौधों के संरक्षण का संदेश दिया। साथ ही अचानकमार टाइगर रिजर्व में बाघ संरक्षण, पर्यटन विकास एवं स्थानीय लोगों के रोजगार सृजन की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए वन विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को बधाई दी।

*अचानकमार में बढ़कर 18 हुई बाघों की संख्या*

कलेक्टर कुन्दन कुमार ने कहा कि अचानकमार टाइगर रिजर्व में बाघ संरक्षण के लिए निरंतर प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि अचानकमार में बाघों की संख्या बढ़कर अब *18* हो गई है। यह वन विभाग एवं संबंधित संस्थाओं की मेहनत और प्रभावी संरक्षण का परिणाम है। बाघों के संरक्षण से अचानकमार टाइगर रिजर्व का पर्यावरणीय संतुलन मजबूत हो रहा है। आज अचानकमार की पहचान देश के प्रमुख टाइगर रिजर्व क्षेत्रों में तेजी से स्थापित हो रही है।

फील्ड डायरेक्टर प्रियंका पांडेय ने कहा कि जंगल केवल वन्यजीवों का आश्रय नहीं, बल्कि मानव जीवन को शांति, स्वच्छ वातावरण और प्राकृतिक संतुलन प्रदान करने वाले महत्वपूर्ण केंद्र हैं।

वनमंडलाधिकारी अभिनव कुमार ने कहा कि भारत विश्व के लगभग 75 प्रतिशत बाघों का घर है। वर्ष 2008 में देश में 1411 बाघ थे, जो प्रभावी संरक्षण प्रयासों के चलते आज बढ़कर 3600 से अधिक हो चुके हैं। अचानकमार में भी वन विभाग, स्थानीय समुदाय और विभिन्न संस्थाओं के संयुक्त प्रयासों से उल्लेखनीय सफलता मिली है।

जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीकांत पांडेय ने कहा कि वर्ष 2010 से विश्व स्तर पर बाघ संरक्षण के उद्देश्य से विश्व बाघ दिवस मनाया जा रहा है। उन्होंने आमजन से जल, जंगल और जमीन के संरक्षण के लिए सक्रिय सहभागिता निभाने की अपील की।

कार्यक्रम में बाघिन झुमरी की बांधवगढ़ से अचानकमार यात्रा एवं प्रजनन प्रक्रिया पर आधारित प्रेरक वीडियो का प्रदर्शन किया गया। समापन में अतिथियों को बाघ का प्रतीकात्मक चित्र प्रदान किया गया। साथ ही एटीआर में उन्नयन कार्य के लिए औषधालय अचानकमार को सम्मानित किया गया।

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